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Karnataka 2nd PUC Hindi Textbook Answers Sahitya Gaurav गद्य Chapter 1 सुजान भगत
सुजान भगत Questions and Answers, Notes, Summary
I. एक शब्द या वाक्यांश या वाक्य में उत्तर दीजिए।
प्रश्न 1.
सीधे-सादे किसान धन आते ही किस ओर झुकते है?
उत्तर:
सीधे-सादे किसान धन आते ही धर्म और कीर्ति की ओर झुकते है।
प्रश्न 2.
कानूनगो इलाके में आते तो किसके चौपाल में ठहरते?
उत्तर:
कानूनगो इलाके में आते तो सुजान के चौपाल में ठहरते।
प्रश्न 3.
सुजान ने गांव में क्या बनवाया?
उत्तर:
सुजान ने गाँव में एक पक्का कुआँ बनवाया।
प्रश्न 4.
सुजान की पत्नी का नाम क्या है?
उत्तर:
सुजान की पत्नी का नाम बुलाकी है।
प्रश्न 5.
सुजान के बड़े बेटे का नाम क्या है?
उत्तर:
सुजान के बड़े बेटे का नाम है भोला है।
प्रश्न 6.
सुजान के छोटे बेटे का नाम क्या है?
उत्तर:
सुजान के छोटे बेटे का नाम शंकर है।
प्रश्न 7.
कौन द्वारा पर आकर चिल्लाने लगा?
उत्तर:
एक भिखमंगा द्वार पर आकर चिल्लाने लगा।
प्रश्न 8.
बुढापे में आदमी की क्या मारी जाती है?
उत्तर:
बुढापे में आदमी की बुद्धि मारी जाती है।
प्रश्न 9.
घर में किसका राज होता है?
उत्तर:
घर में जो कमाता है उसीका राज होता है।
प्रश्न 10.
कटिया का ढेर देखकर कौन दंग रह गयी?
उत्तर:
कटिया का ढेर देखकर बुलाकी दंग रह गयी।
प्रश्न 11.
सुजान की गोद में सिर रखे किन्हे अकथनीय सुख मिल रहा था?
उत्तर:
सुजान की गोद में सिर रखे बैलों को अकथनीय सुख मिल रहा था।
प्रश्न 12.
शिक्षक के गाँव का नाम लिखिए।
उत्तर:
शिक्षक के गाँव का नाम था अमोला।
II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर: दीजिए।
प्रश्न 1.
सुजान महतो की संपत्ति बढी तो क्या करने लगा?
उत्तर:
सुजान महतो की सम्पत्ति बढ़ी तो चित्त की वृत्ति धर्म की ओर झुक पड़ी। साधु-सन्तों का आदर-सत्कार होने लगा। बड़े अफसर गाँव में आते तो सुजान के चौपाल में ही ठहरते। वे उनकी देख-रेख अच्छी तरह से करते थे। भजन-भाव होने लगा। सुजान ने गाँव में एक पक्का कुआँ बनवाया, ब्रह्मभोज हुआ। पूरे गाँववालों को न्योता था। गया के यात्री गाँव में आकर ठहरे तो सुजान और उनकी पत्नी गया जाकर आए। आने के बाद यज्ञ और फिर ब्रह्मभोज। इस तरह के कार्य करने से गाँव के सभी लोग उनका आदर करने लगे।
प्रश्न 2.
घर में सुजान-भगत का अनादर कैसे हुआ?
उत्तर:
जब से सुजान महतो, सुजान भगत बन गया तो उसके हाथों से धीरे-धीरे अधिकार छीने जाने लगे। किस खेत में क्या बोना है, किसको क्या देना है, किसकों क्या लेना है, किस, भाव क्या चीज बिकीं, ऐसी-ऐसी महत्वपूर्ण बातों में भी भगत जी की सलाह न ली जाती। भगत के पास कोई जा नही पाता। उसके दोनो लडके और पत्नी ही हर मामला तय करती। गाँव भर में सुजान का मान-सम्मान बढता था, लेकिन अपने ही घर में घटता जाता।
प्रश्न 3.
सुजान भगत पेड के नीचे बैठकर क्या जोचता है?
उत्तर:
पेड़ के नीचे बैठकर सुजान विचारों में मग्न हो गया। अपने ही घर में उसका यह अनादर। वह कोई अपाहिज नहीं, घर का सब काम करता है, फिर भी अनादर! उसी ने कमाया, उसी ने सब-कुछ किया, फिर भी कोई अधिकार नहीं! अब वह द्वार का कुत्ता है, जो रूखा-सूखा मिले, वही खाकर पड़ा रहे। ऐसे जीवन को धिक्कार है
प्रश्न 4.
सुजान भगत को सबसे अधिक क्रोध बुलाकी पर क्यों आता है?
उत्तर:
सुजान को सबसे अधिक क्रोध बुलाकी पर था। क्योंकि अपने बेटों को वह कुछ भी कहती नहीं, वह भी उन्हीं का साथ देती। रात-दिन मेहनत करके पसीना बहाया, गर्मी-सर्दी सब-कुछ सहा, पर आज भीख तक देने का अधिकार उसे नहीं। बुलाकी ने उसकी अभी तक कमाई खाई थीं, पर आज उसका ही विरोध कर रही है। अब बुलाकी के बेटे प्यारे हैं और वह निखटू है। आज बुलाकी के बेटे हैं और वह उसकी माँ है। सुजन तो बाहर का आदमी है।
प्रश्न 5.
चैत के महीने में खालिहानों में सत युग के राज का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चैत का महीना था। खलिहानों में सतयुग का राज था। जगह-जगह अनाज के ढेर लगे हुए थे। यही किसानों का सफल जीवन है, जब गर्व से उनका हृदय फूलता है। सुजान अनाज भरकर देता और बेटे अंदर रख आते। कितने ही भाट और भिक्षुक भगत उसे घेरे रहते थे। उनमें वह भिक्षुक भी था, जो आठ महीने पहले भगत के द्वार से निराश लौटा था। लेकिन आज खूब-सारा अनाज देकर उसे बिदा किया।
प्रश्न 6.
सचमुच भगत भिक्षुक को कैसे संतुष्ट करता है?
उत्तर:
जब भिक्षुक सुजान के द्वार पर आता है तो सुजान कहता है – तुमसे जितना उठाया जा सकता है, उतना अनाज ले जाओ। भिक्षुक लोक-लाज से अधिक अनाज लेने में शर्मिंदा होता है, फिर भी सुजान उसे खूब-सारा अनाज चादर में भरकर देता है। उसे इसमें बड़ा आनंद आ रहा था।
प्रश्न 7.
सुजान भगत अपना खोया हुआ अधिकार फिर कैसे प्राप्त करता है?
उत्तर:
सुजान महतो जब सुजान भगत बना तो उसने कामकी सारी जिम्मेदारी अपने बेटो को सौंप दी। बच्चे उसका बड़ा आदर करते थे लेकिन घर में अब सब उनका ही अधिकार चलता यथे जहाँ राज्य किया था वहाँ पराधीन बनकर रहना सुजान को अच्छा नही लगा सुजानने सोच लिया। उसमें वह लाग थी ताकद थी। वहा फिरसे खेत में काम करने लगा इतना श्रम जितना जीवन में उसने कभी न किया था। गाँव में हुई टीकाओं पर उसने ध्यान नही दिया। अबके उसके खेत सोना उगल दिया। जहाँ मुश्किल से पाँच मन होता था, उसी खेत में दस मन की उपज हुई। बेटे देखते रहे। इस तरह उसने फिर से ऐसे अपना अधिकार प्राप्त किया।
III. निम्न लिखित वाक्य किसने किससे कहा।
प्रश्न 1.
धरम के काम मे मीन-मेष निकालना अच्छा नहीं?
उत्तर:
इस वाक्य को सुजान ने बुलाकी से कहा।
प्रश्न 2.
दिन भर एक न एक खुचड़ निकालते रहते हैं।
उत्तर:
इस वाक्य को भोलाने बुलाकी से कहा।
प्रश्न 3.
आधी रोटी खाओ, भगवान का भजन करो और पडे रहो।
उत्तर:
इस वाक्य को बुलाकी ने सुजान से कहा।
प्रश्न 4.
क्रोधी तो सदा के हैं। अब किसी की सुनेंगे थोडे ही।
उत्तर:
बुलाकी ने यह वाक्य भोला से कहा।
प्रश्न 5.
बाबा, इतना बोझ से उठ न सकेगा।
उत्तर:
भिक्षुक ने सुजान भगत को कहा।
IV. ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए:
प्रश्न 1.
भगवान की इच्छा होगी, तो फिर रुपये हो जायेंगे। उनके यहाँ किस बात की कमी है?
उत्तर:
प्रसंग: इस वाक्य को सुजान भगत पाठ से लिया गया है, जिसके लेखक है- प्रेमचंद
व्याख्या -इस वाक्य को सुजान ने अपनी पत्नी बुलाकी से कहा है। एक दिन जब गया के यात्री उसकी यहाँ ठहरे तो सुजान ने कहा कि उसकी भी बहुत दिनों से इच्छा थी कि गया जाए। बुलाकी ने अगले साल देखेंगे, हाथ खाली हो जाएगा कहा तो सुजान ने अगले साल का क्या भरोसा, धर्म के काम को टालना नही चाहिए कहते हुए ऊपर की बात कही।
प्रश्न 2.
अभी ऐसे बुढे नही हो गए कि कोई काम ही न कर सके
उत्तर:
इस वाक्य को भोला ने अपने माँ बुलाकी को कहा। दरवाजे पर जब एक भिखमंगा खडा चिल्ला रहा था। बुलाकी काम में व्यस्त थी वह कहती है कि भगत बन ऐसे ही बिना काम करते पड़े रहना था तो वह सुजान को गुरुमंत्र न लेने देती। भोला भी ऊपर दिया वाक्य कहता है कि सारा दिन पूजा-पाठ में उडता है, भगत हुए तो दीन-दुनिया दोनों को छोड़ दिया।
प्रश्न 3.
आदमी को चाहिए कि जैसे समय देखे वैसा काम करे प्रसंग:
उत्तर:
व्याख्या – ऊपर के वाक्य को बुलाकीने अपने पति सुजान से कहा है। सुजान जब भीखमंगेको सेर भर जौ दिया तो भोला ने उन्हे बहुत बुरा-भला कहा जिससे सुजान बहुत क्रोधित हुए। बुलाकी सुजान को खानेको बुलाने गयी सुजान ने मना किया। तब बुलाकी अपने बेटे की बात का क्या बुरा मानना कहकर दुनिया के दस्तूर की बात करती हुई कहती है जो कमाता है घर में उसीका राज होता है, आदमी को चाहिए कि जैसा समय देखे वैसा काम करे समझाया।
प्रश्न 4.
अब तक जिस घर में राज्य किया, उसी घर में पराधीन बनकर नहीं रह सकता।
उत्तर:
प्रसंग : इस वाक्य को ‘सुजान भगत’ पाठ से लिया गया है। लेखक है प्रेमचंद।
व्याख्या : सुजान के भगत बनते ही उसके हाथोंसे धीरे-धीरे अधिकार छीने जाने लगे। किस खेत में क्या बोना है, किसे को क्या देना है, किसके क्या लेना है किस भाव क्या चिज बिकी, ऐसी महत्वपूर्ण बातों में भी भगत की सलाह न ली जाती। दोनो लडके और बुलाकी ही सब निर्णय लेते। जिस दिन भीख देनेकी बात को लेकर बेटेने और बुलाकी ने कुछ कह दिया तब सुजान ने ऊपर कही बात सोच ली।
प्रश्न 5.
बाबा, इतना मुझ से उठ न सकेगा।
उत्तर:
भिक्षुक ने सुजान भगत को कहा।
V. वाक्य शुद्ध कीजिए:
1. सुजान एक पक्का कुँआ बनवाया।
उत्तर:
सुजानने एक पक्का कुँआ बनवाया।
प्रश्न 2.
प्रातःकाल स्त्री पुरुष गया चला गया।
उत्तर:
प्रातःकाल स्त्री और पुरुष ‘गया चले गये।
प्रश्न 3.
मुझसे कल बहुत बड़ा भूल हुआ।
उत्तर:
मुझसे कल बहुत बड़ी भूल हुई।
प्रश्न 4.
उसके हाथ कांप रही थी।
उत्तर:
उसके हाथ काँप रहे थे।
प्रश्न 5.
सब यही कहेंगे कि भिक्षुक कितनी लोभी है।
उत्तर:
सब यही कहेंगे कि भिक्षुक कितना लोभी है।
VI. कोष्ठक में दिए गए कारक चिन्हों से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए। (ने, से, की, का ,को)
- चैत का महीना था।
- जो खर्च करता है, उसी को देता है।
- अब इन व्यापारों से धृणा होती थी।
- भिक्षुक ने भोला की ओर संदिग्ध नेत्रों से देखा।
- तुम्हारे बेटों की तो कमाई है।
VII. निम्नलिखित वाक्यों को सूचनानुसार बदलिए।
1. सुजान के खेत में कंचन बरसता है। (भविष्यत काल में बदलिए)
सुजान के खेत में कंचन बरसता था।
2. सुजान के मन में तीर्थ यात्रा करने की इच्छा थी। (वर्तमान काल में बदलिए)
सुजान के मन में तीर्थ यात्रा करने की इच्छा है।
3. शंकर गाड़ी में नारियल भर कर लाता है। (भूतकाल में बदलिए)
शंकर गाड़ी में नारियल भर कर लाता था।
VIII. अन्य लिंग रूप लिखिए।
1. भिखारी – भिखारिन आदमी-औरत, पिता-माता पुजारी-पुजारिन विद्वान-विदुषी, भगवान – भगवती, – स्त्री-पुरुष, साधु-सधुआइन
IX. अन्यं वचन रूप लिखिए।
1. घर-घर, बात-बाते, अभिलाषा – अभिलाषाएँ, लाडका-लडके, रोटी-रोटियाँ, भिक्षुक-भिक्षुकगण, – महीना-महीनो, टीका-टीकाएँ
X. विलोम शब्द लिखिए:
- मुरझाना x खिलना
- जीवन x मरण
- सुंदर x कुरुप,
- सुख x दुःख
- आशा x निराशा
- मुश्किल X आसान
सुजान भगत Summary in English
This is one of ‘Premchand’s great stories. The story of Sujan Mahto, a farmer, who worked really hard, day and night and earned a lot of money, property and fame. Once he had achieved everything, his mind slowly drifted away from all this worldly matter. He started doing charity – ‘Dan Dharm’. He started feeding hundreds of people. Travellers, great saints and noteworthy people started visiting his house. There was no end to his kindness and generosity. Within no time, people started calling him Sujan Bhagat. He too started living a saintly life. He started getting up early and spending time in pooja. He stopped lying and helping others was the main thing for him.
Those who were jealous of Sujan thought that he must have found some hidden wealth for his prosperity. Slowly, Sujan detached himself from all worldly things. His sons, Bhola and Shankar took over the control of everything. Bhola started deciding about how to run the family. All the major decisions were taken by him. Sujan became just a mute spectator.
Once when Şujan was giving alms to a person, he was stopped by his wife Bulaki and son Bhola. Sujan did not like this, as he felt he was losing his hold on everything. He had become useless. At first, he was angry with his wife Blake, who had sided her son and spoke against Sujan. She knew how hard Sujan had worked, had sacrificed so much to come up to this stage, and now when he had no say, no power in this house, she did not come to his support.
Sujan pondered the whole night, decided on some plan of action, and the next day early in the morning, went to the fields with the plough in hand. Once again he started working hard that surprised everyone. Bhola and Shankar being young wanted to enjoy life and they couldn’t work like Sujan. Slowly, Sujan earned back the same respect and value in his house. He donated what he felt was right. Once again no poor man would go from his house empty-handed. He started ordering around his sons, who had nothing to say but to obey him.
Sujan was right when he realized that he was not too old to work. He understood, that it was the way of life. The moment you stop working and stop earning, you lose your power and value and thus self-respect too. His entire life he had lived in hardship to provide riches to his family, and even at this age he had to prove this to his family once again.