Students can Download 2nd PUC Hindi Previous Year Question Paper June 2019, Karnataka 2nd PUC Hindi Model Question Paper with Answers helps you to revise the complete Karnataka State Board Syllabus and to clear all their doubts, score well in final exams.
Karnataka 2nd PUC Hindi Previous Year Question Paper June 2019
Time: 3.15 Hours
Max Marks: 100
सूचना:
- सभी प्रश्नों के उत्तर हिन्दी भाषा तथा देवनागरी लिपि में लिखना आवश्यक है।
- प्रश्नों की क्रम-संख्या लिखना अनिवार्य है।
I. (अ) एक शब्द, वाक्यांश या वाक्य में उत्तर लिखिए : ( 6 x 1 = 6 )
प्रश्नः 1.
कर्त्तव्य किस पर निर्भर है?
उत्तर:
कर्तव्य न्याय पर निर्भर है।
प्रश्नः 2.
किसका व्यापारीकरण हो रहा है?
उत्तर:
धर्म का व्यापारीकरण हो रहा है।
प्रश्नः 3.
विश्वेश्वरय्या का पूरा नाम लिखिए ?
उत्तर:
विश्वेश्वरय्या का पूरा नाम मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या।
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प्रश्नः 4.
चीफ साहब बड़ी रुचि से किसे देखने लगे?
उत्तर:
चीफ़ साहब बड़ी रुचि से फुलकारी देखने लगे।
प्रश्नः 5.
स्वर्ग या नरक में निवास स्थान “अलॉट’ करनेवाले कौन है?
उत्तर:
स्वर्ग या नरक में निवास स्थान अलॉट करनेवाले है धर्मराज।
प्रश्नः 6.
‘नारा’ का प्रसिद्ध मन्दिर कौन सा है?
उत्तर:
तोदायजी नारा का प्रसिद्ध मंदिर है ।
(आ) निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लिखिए : ( 3 x 3 = 9 )
प्रश्नः 7.
सुजान भगत को सबसे अधिक क्रोध बुलाकी पर क्यों आता है?
उत्तर:
सुजान को सबसे अधिक क्रोध अपनी पत्नी बुलाकी पर आया। क्योंकि वह भी लड़कों का साथ देती थी। लडकों को मालूम नही कितने परिश्रम से उसने गृहस्थी जोडी है लेकिन उसे तो मालूम है। सुजान ने दिन-को दिन और रात को रात नही समझा। इतनी कड़ी मेहनत की। भादो की अँधेरी रात में मडैया लगा के जुआर की रखवाली करता था । जठे-बैसाख की दोपहरी में भी दम न लेता था। अब उसी घर में उसे इतना भी अधिकार नहीं कि वह भीख तक दे सके। सुजान ने कभी न उसे मारा, ना पैसे की कमी की। बीमारी में उसे वैद्य के पास ले जाता। अब उसे अपने बेटे ही सब कुछ लगते है।
प्रश्नः 8.
गंगा मैया का कुर्सी से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
राजनीति के क्षेत्र में लोग आपस में लड़ रहे हैं। दल से दल लड़ता है। असली झगड़ा कुर्सी का है। कुर्सी से गंगामैय्या का मतलब है शक्ति और शक्ति याने वैभव, धन, सम्मान, कीर्ति आदि। एक बार जबान पर इन बातों का स्वाद चढ़ जाए तो फिर कुछ भी अच्छा नहीं लगता। इसके छीने जाने पर लोग ऐसे भटकते हैं जैसे मजनू लैला के पीछे ।
प्रश्नः 9.
मन्नू भंडारी की माँ का परिचय दीजिए।
उत्तर:
मन्नू की माँ उनके पिता के ठीक विपरीत थी। . वह पढ़ी-लिखी नहीं थी। धरती से ज्यादा धैर्य और सहनशक्ति उसमें थी। पिताजी की हर ज्यादती को वह सह लेती और बच्चों की हर जिद हर फरमाइश सहज भाव से स्वीकार करती। सबकी इच्छा और पिताजी की आज्ञा को पालन करने के लिए सदैव तैयार रहती। सारे बच्चों का लगाव माँ के साथ था । लेकिन चुपचाप असहाय मजबूरी में रहना, उनका त्याग वगैरा सब मन्नू के लिए कभी आदर्श नहीं रहा ।
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प्रश्नः 10.
विश्वेश्वरय्या के गुण-स्वभाव का परिचय दीजिए।
उत्तर:
विश्वेश्वरय्या का चारित्र आदर्श पूर्ण था। वे विनयशील तथा साधु प्रकृति के पुरुष थे। ईमानदारी तो उनके चरित्र की अटूट अंग थी असाधारण प्रतिभा रखते हुए भी उन्होने कभी गर्व का अनुभव नही किया समय के वे बडे पाबंद थे। जिन्दगी भर उन्होने अथक परिश्रम किए। कई बार कई बाधाओं का सामना कर उन्होने अपनी योजना ओंको साकार बनाया।
प्रश्नः 11.
जापान के ‘हिरन-वन’ के बारे में लिखिए।
उत्तर:
हिरन वन में हिरन भारतीय हिरनों की तुलना में ज्यादा हट्टे-कट्टे है, दूर से देखने पर तगड़े, बछड़ों की तरह है। वन में जगह जगह आटे के बिस्किटों का पैकेट मिलता है, १५० येन में उसे खरीदकर लोग खिलाते हैं। वे अपने सुडौल गर्दन ऊपर कर उसे खा लेते हैं। कुछ लोग बिस्किटों के जगह हिरनों का केले खिलाते हैं। आसपास के हिरन बिना डरे लेखिका के हाथ से केला छीन कर खा जाते हैं।
II. (अ) निम्नलिखित वाक्य किसने किससे कहेः ( 4 x 1 = 4 )
प्रश्नः 12.
‘धरम के काम में मीन-मेष निकालना नहीं।’
उत्तर:
इस वाक्य को सुजान ने बुलाकी से कहा।
प्रश्नः 13.
‘बंद करो अब, इस मन्नू का घर से बाहर निकलना।’
उत्तर:
मन्नु के पिता ने मन्नू की माँ से कहा।
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प्रश्नः 14.
“सच ? मुझे गाँव के लोग बहुत पसंद है”।
उत्तर:
इस वाक्य को सुजान ने बुलाकी से कहा।
प्रश्नः 15.
‘गरीबी की बीमारी थी ।’
उत्तर:
भोलाराम की पत्नी ने इस वाक्य को नारद से कहा।
(आ) निम्नलिखित में से किन्हीं दो का ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए : ( 2 x 3 = 6 )
प्रश्नः 16.
“जिधर देखो उधर कर्त्तव्य ही कर्त्तव्य देख पड़ते हैं।”
उत्तर:
प्रसंग :इस वाक्य को डॉ. श्यामसुन्दर दास के लिखे पाठ कर्तव्य और सत्यता पाठ से लिया गया है।
व्याख्या :कर्तव्य के बारे में बताते हुए लेखक कह रहे हैं कि इसका आरंभ घर से ही होता है। घर में एक दूसरे के प्रति, माँ-बाप के प्रति बच्चों का, पति का पत्नी के प्रति ऐसे परस्पर कर्तव्य होते हैं। घर के बाहर समाज के प्रति. अपने मित्र पड़ोसियों के प्रति भी हमारे कुछ कर्तव्य होते हैं ऐसे लगता है कि हमारा जीवन कर्तव्यों से ही भरा पड़ा है।
प्रश्नः 17.
‘एक ओर वे बेहद कोमल और संवेदनशील व्यक्ति थे तो दूसरी ओर बेहद क्रोधी और अहंवादी।’
उत्तर:
उत्तर प्रसंग : इस वाक्य को मन्नू भंडारी के लिखे ‘एक कहानी यह भी’ से लिया गया है।
व्याख्या : अजमेर से पहले मन्नु के पिता इंदौर में थे जहाँ पर उनका बहुत मान-सम्मान, प्रतिष्ठा थी। आर्थिक झटके के कारण वे इंदौर से अजमेर आए। काँग्रेस के साथ-साथ वे समाज सुधार कामों से भी जुड़े हुए थे। शिक्षा को वे केवल उपदेश नहीं देते थे बल्कि आठ-आठ दस-दस विद्यार्थीयों को अपने घर में रखकर पढ़ाया करते थे। वे बहुत दरियादिल थे।
एक ओर वे बेहद कोमल और संवेदनशील व्यक्ति थे तो दूसरी ओर बेहद क्रोधी और अहंवादी। उन्होंने अपने बल-बूते पर अंग्रेजी-हिन्दी विषयवार शब्दकोश तैयार किया। अपनों के विश्वासघात, आर्थिक विवशता, नवाबी आदतें, अधूरी महत्वाकांक्षा के कारण आखिरी दिन में वे बहुत शक्की बन गए थे। रसोई को वे भटियारखाना कहते थे और वे नहीं चाहते थे कि मन्नू रसोई में जाएँ । उनके घर में आए दिन विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के जमावड़े होते थे और जमकर बहसें होती थी।
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प्रश्नः 18.
“मेरी माँ गाँव की रहनेवाली हैं। उमर-भर गाँव में रही हैं।
उत्तर:
प्रसंग – इस वाक्य को चीफ़ की दावत से लिया गया है. जिसे लेखक है भीष्म साहनी। व्याख्य : शामनाथ नही चाहते थे कि चीफ़ की नजर माँ पर पडे लेकिन बरामदे में बैठी शामनाथ की माँ को देख चीफ ने आगे बढकर दाँया हाथ मिलाकर हाउ डू यू डू? कहा दायें हाथ में माला होने के कारण उसने बाया हाथ मिलाया इतने सारे लागों को अचानक सामने देख वह हडबडाई हुई थी। उसके मुँहसे कुछ न निकला। मुश्किल से कहा उठी हार डू कू … तब शामनाथ ने यह बात चीफ़ से कही।
प्रश्नः 19.
“साधु-संतों की वीणा से तो और अच्छे स्वर निकलते हैं।”
उत्तर:
प्रसंग : इस वाक्य को भोलाराम के जीव पाठ से लिया गया है जिसके लेखक है-हरिशंकर परसाई। व्याख्या : इस वाक्य को बडे साहब ने नारद से कहा है। नारद के पास देने के लिए कुछ भी नही था। तो साहब ने उनकी वीणा की तरफ देखकर कहा कि यह भी वह भोलाराम की दरखास्त पर रखा जा सकता है। उसकी बेटी गाना-बजाना सीखती है वह वीणा वह उसी को देगा। तब उन्होने इस वाक्य को कहा।
III. (अ) एक शब्द या वाक्यांश या वाक्य में उत्तर लिखिए। ( 6 x 1 = 6 )
प्रश्नः 20.
श्रीकृष्ण के अनुसार किसने सब माखन खा लिया?
उत्तर:
श्रीकृष्ण के अनुसार उसके सखा सब माखन खा गए।
प्रश्नः 21.
चित्ता किसे जलाती है?
उत्तर:
चिता निर्जिव शरीर को जलाती है।
प्रश्नः 22.
कवि नरेन्द्र शर्मा क्या न बनने का संदेश देते हैं?
उत्तर:
कवि नरेन्द्र शर्मा कायर न बनने का संदेश देते है।
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प्रश्नः 23.
हवा को क्या हो जाने से बचाना है?
उत्तर:
हवा को धुआँ हो जाने से बचाना है ।
प्रश्नः 24.
राणा की हुंकार कहाँ सुनी जा सकती है?
उत्तर:
राणा की हुंकार राजस्थान में सुनी जा सकती है।
प्रश्नः 25.
दीवार किसकी तरह हिलने लगी?
उत्तर:
दीवार परदों की तरह हिलने लगी।
(आ) निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर लिखिए। ( 2 x 3 = 6 )
प्रश्नः 26.
गोपिकाएँ अपने आपको क्यों भाग्यशालिनी समझती हैं?
उत्तर:
सूरदास पहले पद में गोपिकाएँ और उद्भव के बीच हुए बातचीत के बारे में कह रहे है। गोपिकाँए अपने आपको बहुत भाग्यशालिनी कह रही है। जिन आँखोको शाम को देखने का सौभाग्य मिला जैसे भौरे फूलो से प्यार करनेवाले । फूलोंकी सुगंध हवा चारों ओर फैलाती है। अंग-अंग खुशी से रोमांचित हुआ है बहुत सुख का अनुभव कर रही है। आजकल दर्पण मे देखना भी बहुत अच्छा लग रहा है प्यार की झलक से चेहरा परम सुंदर दिख रहा है। सुरदास कह रहे है ऐसे कृष्ण हम को भी मिले ताकि हमारे विरह का दुःख भी चला जाएगा। गोपियों की तरह हम भी सुख और आनंद में लहरेगे।
प्रश्नः 27.
बेटी रंगीन कपड़े और गहने क्यों नहीं चाहती हैं?
उत्तर:
बेटी सोने-चांदी के गहने पहनकर या रंगीन कपडे पहनकर सुंदर दिखना नही चाहती। हम जैसे है वैसे ही सुंदर है, जैसे भगवान ने हमें बनाया है। गहने पहनना उसे एक बंधन सा लगता है, उसे तकलीफ होती है उन्हे पहनने से। कपडे भी अगर रंग-बिरंगे हो कीमती, हो तो उसे संभालना पडता है वहज हाँ चाहे वहाँ, मिट्टी में खेल भी नही सकते इसलिए वह रंगीन कपडे और गहने . नही पहनना चाहती।
प्रश्नः 28.
पर्यावरण के संरक्षण के सम्बन्ध में कवि कुँवर नारायण के विचार लिखिए।
उत्तर:
पेड के कट जानेसे कवि संवेदनशील हो गए है, उसकी याद में वह भावनाशील हो गए हैं। वह कह रहे है शुरु से ही मुझे डर था कि कोई दुश्मन इस पेड़ को काट न दे। अब सवाल एक पेड का नहीं, ऐसे कई पेड, कई जगह पर कटे जा रहे है। अपने स्वार्थ के लिए, कभी जगह के लिए तो कहीं लकडी फर्निचर घर बनान लोग पेड़ों को काट रहे है। इन लूटेरों में अब हमे बचाना है। इन आतंक फैलाने वालों से, अपने शहर को बचाना है । अपने देश को इन गद्दारों से बचाना है क्योंकि वे अपने देश या यहाँ के लोगों के बारे में नही सोच रहे है।
आज वे इन पेड़ों को काट रहे है कल ये लूटेरे सारे देश को लूटेंगे नही तो एक दिन ये नदियाँ नाले जैसे बन जाएँगे, हवा धुंआ हो। जाएगा, घुओ से भर जाएगा, तो साँस लेना भी मुश्किल हो जाएगा। पेड नही रहेंगे, बारिश न होगी, हवा गंदी हो, जाएगी तो खाना भी जहर हो जाएगा, जंगल कट जाँएगे और मरुस्थल बन जाएगा। इसके पहले कि यह हाल बनाएँगे हमे बचाना है इस देश को नही तो एकदिन यहाँ सिर्फ मनुष्यों का जंगल बन जाएगा और सभी मनुष्य जानवर जैसे व्यवहार करने लगेगे।
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प्रश्नः 29.
दक्षिण प्रदेश की महत्ता को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
दक्षिण को तो मानवजी रत्नों की खान कहा है जहाँ बहुत से कलाओं को सहारा मिला है। तमिल नाडू क महाकवि कम्ब ने रामायण, लिखा है। केरल और आन्ध्रप्रदेश में भारत की सभ्यता और संस्कृति पनपी है, विकसीत हुई है कहा है। महाराष्ट्र तो मराठा राजा शिवाजी, उसका वीरता की गाथा से भरा पड़ा है। इतने वीर और महापुरुष वहाँ होकर गए है।
(इ) ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए। ( 2 x 4 = 8 )
प्रश्नः 30.
(i) प्रभुजी तुम दीपक, हम बाती, जाकी ज्योति बरे दिन राती।
उत्तर:
रैदास इस दोहे में कहते हैं : हे प्रभु तुम दीपक और मैं बाती हूँ जो दिन-रात जलती रहती है। और तू प्रकाश देता रहता है। है प्रभु, तुम मेरे स्वामी हो और मैं तुम्हारा दास हूँ रैदास तुमसें इसतरह जुडा हुआ है। रैदास तुम्हारा ऐसा भक्त है।
अथवा
(ii) अति अगाधु अति औथरी, नदी, कूप, सरू वाइ ।
सो ताको सागरू जहाँ, जाकी प्यास बुझाई ।
उत्तर:
बिहारी इस दोहे में कह रहे है-सागर कितना गहरा और कितना विशाल होता है। बाकी के सब, जलाशय नदी, कूप, सरोवर नालाव समंदर से छोटे और उथले होते है लेकिन वही सबकी प्यास बुझाते है। समंदर के पास जाने से कोई प्यासा ही वापस आता है।
प्रश्नः 31.
(i) युद्धं देहि कहे जब पामर, दे न दुहाई
पीठ फेरकर,
या तो जीत प्रीति के बल पर या तेरा पद
चूमे तस्कर ॥
उत्तर:
कुछ भी बन बस कायर मत बना कवि कह रहे है अगर कोई दृष्ट, क्रूर मनुष्य तुमसे टक्कर लेने खडा हो जाए तो उसकी ताकद से डरकर तू पीछे मत हट। पीठ दिखाकर भाग न खडा हो। बुद्ध – मदर तेरेसा जैसे कई महापूरुष/स्त्रियाँ होकर गई है जिन्होने अपने प्यार और सेवाभाव से दृष्टों को भी जीत लिया है। क्यों कि हिंसा का जवाब प्रतिहिंसा से देना भी दुर्बलता है लेकिन फिर भी कायरता तो उससे भी अपवित्र है। इसलिए कुछ भी बन लेकिन कायर मत बन।
अथवा
(ii) वे मुस्काते फूल, नहीं-जिनको आता है मुरझाना, वे तारों के दीप, नहीं-जिनको भाता है बुझ जाना ।
उत्तर:
कवयित्री महादेवी वर्मा इन पक्तियों में कह रही है कि फूल खिलते है दूसरों कों खुशी देने के लिए। वह खिलकर हर तरफ खुशी फैलाकर मुरझा जाते है। वह फूले ही क्या जो ऐसे ही खिलकर मुरझा जाते है? दूसरों के लिए खिलकर मुरझाने में ही खुशी है। आकाशमें टिमटिमाते तारे, दुनिया भर को खुशियों से भर देते है, उनमें उम्मीद जगाते है, रोशनी देने में मदद करते है, नही तो उनका होना भी बेकार है। जो ऐसे ही बुझ जाते है।
IV. (अ) एक शब्द या वाक्यांश या वाक्य में उत्तर लिखिए। ( 5 x 1 = 5 )
प्रश्नः 32.
नौकरों से काम लेने के लिए क्या होनी चाहिए?
उत्तर:
नौकरों से काम लेने के लिए भी तमीज होनी चाहिए।
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प्रश्नः 33.
छोटी बहू के मन में किसकी मात्रा ज़रूरत से ज्यादा है?
उत्तर:
छोटी बहू के मन में दर्प की मात्रा जरूरत से ज्यादा है।
प्रश्नः 34.
भारवि से मिलने आयी स्त्री का नाम लिखिए ।
उत्तर:
भारवि से मिलने आई स्त्री का नाम भारती था।
प्रश्नः 35.
वसंत ऋतु में किसके स्वर से सभी परिचित है?
उत्तर:
वसंत ऋतु में कोकिल स्वर से सभी परिचित है।
प्रश्नः 36.
कवि किस पर शासन करता है?
उत्तर:
कवि समय पर शासन करता है।
(आ) निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लिखिए। ( 2 x 5 = 10 )
प्रश्नः 37.
(i) दादाजी का चरित्र चित्रण कीजिए।
उत्तर:
दादाजी घर के सबसे बड़े हैं। उनकी उम्र 72 है, शरीर अभी तक झुका नहीं और उनकी सफेद दाढ़ी नाभि को छूती है। घर में सब उनकी इज्जत करते हैं। वे अपने परिवार को बरगद के पेड़ के समान मानते हैं और पेड़ से एक भी डाल टूटकर अलग हो जाए यह उनको पसन्द नहीं । जीते जी वह यह होने देना नहीं चाहते इसीलिए सबको बुलाकर वे बेला के साथ आदर के साथ बर्ताव करने कहते हैं। वे परेश को भी समझाते हैं और वह आधुनिक विचारों की है कहकर बाजार भी ले जाने को कहते हैं। सरकार से मिले एक मुरब्बे को अपने परिश्रम, निष्ठा, दूरदर्शिता से उसके दस मुरब्बे बनाये हैं।
अथवा
(ii) बेला की चारित्रिक विशेषताओं पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
उत्तर:
बेला परेश की पत्नी है जो लाहौर के एक प्रतिष्ठित तथा सम्पन्न कुल की सुशिक्षित लड़की है। उसे कई लोगों के बीच रहना पसंद नहीं, उसे आज़ादी चाहिए, बड़ों का हस्तक्षेप नहीं। घर की औरतें जो हमेशा काम करती रहती है उसे पसंद नहीं। उसने रजवा को गँवार कहकर निकाला। उसे अपने कमरे का पुराना फर्निचर पसंद नहीं, दादा ने लाए मलमल का याह आदि उसे पसंद नहीं। वह आधुनिक काल की है। दादाजी के कहने पर जब सब लोगों का व्यवहार उसके प्रति बदल गया वैसे ही उसे भी पश्चाताप हुआ ।
प्रश्नः 38.
(i) भारवि अपने पिता से क्यों बदला लेना चाहता था?
उत्तर:
भारवि महाकवि था, शास्त्रार्थ में सारे पंडितों को
हराता था लेकिन जब उसके मन में अहंकार भर गया तब उसके पिता उन्हीं पंडितों के सामने उसे लांछित करते हैं। जिन पंडितों को वह हराया था वे ही उसका परिहास करते थे। दो बार उन्होंने पण्डितों के सामने भारवि को मूर्ख अज्ञानी कहा, उसकी निन्दा की तो भारवि क्रोध और ग्लानि से भर गया। उसने समझा कि जबतक उसके पिता जिंदा है वह ऐसे ही अपमानित होता रहेगा, इसलिए वह अपने पिता से बदला लेना चाहता था।
अथवा
(ii)सुशीला का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
उत्तर:
सुशीला भारवि की माँ है। संस्कृत के महापंडित श्रीधर की पत्नी है। भारवि के घर न लौटने पर वह बहुत दुःखी है। आभा से यह कहने पर की खाना खाए वह खाना नहीं खाती, भारती जो भारवि को ढूंढने आई उसे भी वह भारवि को ढूँढकर लाने को कहती है। भारवि के पिता उसे समझाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह नहीं समझती। श्रीधर के डाँटने पर ही वह घर नहीं आया लेकिन उसके पीछे पुत्र के भलाई की चिंता थी यह वह समझ जाती है।
V. (अ) वाक्य शुद्ध कीजिए: ( 4 x 1 = 4 )
प्रश्नः 39.
(i) अध्यापक जी पढ़ा रहा है।
उत्तर:
अध्यापक पढ़ा रहे हैं ।
(ii) पृथ्वीराज को पूछो ।
उत्तर:
पृथ्वीराज से पूछो ।
(iii) कोयल डाली में बैठी है।
उत्तर:
कोयल डाली पर बैठी है ।
(iv) कोई ने मेरी पुस्तक देखी ?
उत्तर:
किसी ने मेरी पुस्तक देखी?
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(आ) कोष्टक में दिये गये उचित शब्दों से रिक्त स्थान भरिए : ( 4 x 1 = 4 )
(विज्ञान, स्वभाव, समाज, समय)
प्रश्नः 40.
(i) अपर्णा के…… में मधुरता है।(स्वभाव)
(ii) आज का युग…..का युग है। (विज्ञान)
(iii) ………. परिवर्तनशील है। (समय)
(iv) साहित्य …….. का दर्पण है। (समाज)
(इ) निम्नलिखित वाक्यों को सूचनानुसार बदलिए । ( 3 x 1 = 3 )
प्रश्नः 41.
(i) संदीप कुंभ मेले में जा रहा है। (भविष्यत्काल में बदलिए)
उत्तर:
संदीप कुंभ मेले में जाएगा।
(ii) वसुंधरा ने देश की सेवा की। (वर्तमान काल में बदलिए )
उत्तर:
वसुंधरा ने देश की सेवा कर रही है ।
(iii) वह आग चित्ता पर रखेगा। (भूतकाल में बदलिए)
उत्तर:
उसने आग चित्ता पर रख दी ।
(ई) निम्नलिखित मुहावरों को अर्थ के साथ जोड़कर लिखिए।( 4 x 1 = 4 )
प्रश्नः 42.

उत्तर:
(i) (b)
(ii) (c)
(iii) (d)
(iv) (a)
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(उ) अन्य लिंग रूप लिखिए। ( 3 x 1 = 3 )
प्रश्नः 43.
गाय, अभिनेता, स्वामिनी
उत्तर:
बैल, अभिनेत्री, स्वामी ।
(ऊ) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए। ( 3 x 1 = 3 )
प्रश्नः 44.
(i)आँखों के सामने होनेवाला
उत्तर:
प्रत्यक्ष
(ii) नीचे लिखा हुआ।
उत्तर:
निम्नलिखित
(iii) जो परिचित न हो।
उत्तर:
अपरिचित
(ए) निम्नलिखित शब्दों के साथ उपसर्ग जोड़कर नए शब्दों का निर्माण कीजिए। ( 2 x 1 = 2)
प्रश्नः 45.
(i) शिक्षित
उत्तर:
अ + शिक्षित – अशिक्षित
(ii) जीवन
उत्तर:
अ + जीवन = आजीवन
(ऐ) निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय अलग कर लिखिए। ( 2 x 1 = 2 )
प्रश्नः 46.
(i)पागलपन
उत्तर:
पागल + पन
(ii) महत्वपूर्ण
उत्तर:
महत्व + पूर्ण
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VI. (अ) किसी एक विषय पर निबंध लिखिए। ( 1 x 5 = 5 )
प्रश्नः 47.
(i)दूरदर्शन
उत्तर:
आज के विज्ञान ने मानव को अनेक उपहारों से उपकृत किया है। मनोरंजन के क्षेत्र में भी उसने अनेक ऐसे उपकरण तथा साधन प्रदान किए हैं जिन्होंने इस क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन कर दिया है। मनोरंजन का साधन टेलीविज़न या दूरदर्शन निस्संदेह सर्वाधिक महत्वपूर्ण, लोकप्रिय तथा उपयोगी है क्योंकि यह केवल मनोरंजन का साधन ही नहीं शिक्षा ग्रहण करने का सशक्त उपकरण भी है।
यह एक नवीन आविष्कार है। इसके द्वारा हम घर बैठे-बिठाए संगीत, नाटक, कविता, समाचार, हास्य के कार्यक्रम देख सकते हैं। टेलीविजन सब वर्गों की रुचि की तुष्टि करता है। कुछ कार्यक्रम केवल महिलाओं के लिए तथा कुछ बालकों और विद्यार्थियों के लिए भी होता है। इनसे दर्शकों को सूचना, शिक्षा और मनोरंजन, ये तीनों लाभ होते हैं। भारत में इसका तेज़ी से विस्तार हो रहा है।
इस चमत्कारी यंत्र का आविष्कार महान वैज्ञानिक बेयर्ड ने किया। इसे सर्वप्रथम सन 1925 में लंदन में देखा गया। आज तो घरघर में इसका प्रवेश हो गया है। ‘दूरदर्शन’ अंग्रेजी शब्द टेलीविजन का हिंदी पर्याय है, जिसका अर्थ है ‘दूर की वस्तुओं का दर्शन’। टेलीविजन के आविष्कार ने यह संभव कर दिया कि घटनाएँ हमारी आँखों के सामने प्रत्यक्ष उपस्थित हो जाती हैं। हम उन्हें उसी प्रकार देख सकते हैं, मानो वे हमारे सामने घटित हो रही हों।
दूरदर्शन मनोरंजन का सर्वोत्तम साधन तो है ही, साथ ही शिक्षा का अभूतपूर्व साधन भी बन गया है। अनेक प्रकार की रूढ़ियों, कुरीतियों, सामाजिक बुराइयों, जैसे – दहेज प्रथा, जातिपाँति, मद्यपान, छुआछूत, भ्रष्टाचार आदि से संबंधित कार्यक्रम जब दूरदर्शन पर दिखाए जाते हैं तो इसका प्रभाव जनमानस पर अवश्य पड़ता है। अतः कहा जाता है कि दूरदर्शन जन-जागरण का सशक्त माध्यम है। शिक्षा के प्रचार-प्रसार में दूरदर्शन की भूमिका असंदिग्ध है। आज तो अनेक विषयों की शिक्षा दूरदर्शन के कार्यक्रमों द्वारा दी जाती है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा बनाए गए कार्यक्रमों के माध्यम से विज्ञान, गणित, भाषा, कृषि, कंप्यूटर जैसे अनेक विषयों की शिक्षा नियमित रूप से दी जा रही है।
दूरदर्शन के द्वारा विज्ञान के प्रयोगों, अंतरिक्ष संबंधी नई जानकारी, प्रकृति के छिपे रहस्योंसंबंधी सूचनाएँ, देश-विदेश की घटनाओं संबंधी जानकारी, खेल-कूद तथा अन्य समारोहों का सीधा प्रसारण संभव हो सकता है। हम घर बैठे विश्व के किसी भी कोने में होने वाले कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण देख सकते हैं। समुद्र की गहराइयों, पर्वत-शृंखलाओं, वन्य प्राणियों तथा प्रकृति के अन्य रहस्यों को साक्षात देख सकते हैं। दूरदर्शन ने पृथ्वी को एक परिवार बना दिया है। आज तो दूरदर्शन व्यापार तथा विज्ञापन का भी प्रभावशाली माध्यम बन गया है। अच्छेअच्छे धारावाहिक हमें अपनी संस्कृति से परिचित करा सकते हैं। दूरदर्शन द्वारा जहाँ इतने अधिक लाभ हैं. वहीं कुछ हानियाँ भी अनुभव की जाने लगी है।
आज जिस प्रकार से दूरदर्शन का प्रचार बढ़ता जा रहा है, उसके कारण अनेक समस्याओं ने जन्म लिया है। छात्रों में अनुशासनहीनता, बढ़ता हुआ फैशन तथा शिक्षा के प्रति अरुचि के लिए किसी हद तक दूरदर्शन को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। अभिभावकों की प्रायः यही शिकायत रहती है कि उनके बच्चे पढ़ने से जी चुराते हैं, वे दूरदर्शन के सामने बैठकर ही अपना कीमती समय बरबाद कर देते हैं। अधिक समय तक दूरदर्शन देखते रहने से न केवल उनका मन पढ़ाई से विमुख हो जाता है बल्कि उनकी आँखों की ज्योति पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। आजकल दूरदर्शन पर जिस प्रकार के कार्यक्रमों की भरमार है, उनके कारण छात्रों में नैतिक पतन हो रहा है तथा वे अपनी संस्कृति को विस्मृत कर बैठे हैं। विदेशी चैनलों के आ जाने से जिस प्रकार की सांस्कृतिक प्रदूषण हो रहा है वह अत्यधिक चिंता का विषय है।
इन चैनलों पर दिखाए जाने वाले अधिकांश कार्यक्रमों में जिस प्रकार मद्यपान, कामुक दृश्यों, कैबरे नृत्य, चुंबन, पाश्चात्य संगीत, हिंसा तथा अर्धनग्न दृश्यों का प्रदर्शन किया जा रहा है, उनके कारण युवावर्ग का नैतिक पतन होना स्वाभाविक है। अतः खेद का विषय है कि जो दूरदर्शन जनजागरण तथा शिक्षा का सशक्त माध्यम था, वही आज नैतिक पतन का कारण बन रहा है। ‘यदि समय रहते ऐसे कार्यक्रमों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। हर्ष का विषय है कि सरकार ने इस ओर कुछ कदम उठाए हैं तथा दूरदर्शन पर कुछ शिक्षाप्रद धारावाहिक तथा अन्य कार्यक्रम दिखाए जा रहे हैं। यह ठीक है कि दूरदर्शन के वर्तमान स्वरूप के कारण कुछ समस्याएँ उठ खड़ी हुई हैं, परंतु दूरदर्शन आज के जीवन का महत्वपूर्ण अंग है, अतः सरकार तथा संबंधित निर्माताओं, निर्देशकों तथा अधिकारियों का कर्तव्य है कि मनोरंजन तथा शिक्षा के इस प्रभावशाली माध्यम को उपयोगी बनाने में गंभीरता से आवश्यक कदम उठाएँ ।
(ii) इंटरनेट की दुनिया:
उत्तर:
इंटरनेट दुनिया भर में फैले कम्प्यूटरों का एक विशाल संजाल है जिसमें ज्ञान एवं सूचनाएँ भौगोलिक एवं राजनीतिक सीमाओं का अतिक्रमण करते हुए अनवरत प्रवाहित होती रहती है।
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सियोनार्ड क्लिनरॉक को इन्टरनेट का जन्मदाता माना जाता है। इन्टरनेट की स्थापना के पीछे उद्देश्य यह था कि परमाणु हमले की स्थिति में संचार के एक जीवंत नेटवर्क को बनाए रखा जाए। लेकिन जल्द ही रक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला से हटकर संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त हुआ और अपना धन लगाना प्रारम्भ कर दिया।
1992 ई. के बाद इन्टरनेट पर ध्वनि एवं वीडियो का आदान-प्रदान संभव हो गया। अपनी कुछ दशकों की यात्रा में ही इंटरनेट ने आज विकास की कल्पनातीत दूरी तय कर ली है। आज के इन्टरनेट के संजाल में छोटे-छोटे व्यक्तिगत कम्प्यूटरों से लेकर मेनफ्रेम और सुपर कम्प्यूटर तक परस्पर सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं। आज जिसके पास भी अपना व्यक्तिगत कम्प्यूटर है वह इंटरनेट से जुड़ने की आकांक्षा रखता है।
इन्टरनेट आधुनिक विश्व के सूचना विस्फोट की क्रांति का आधार है। इन्टरनेट के ताने-बाने में आज पूरी दुनिया है। दुनिया में जो भी घटित होता है और नया होता है वह हर शहर में तत्काल पहुँच जाता है। इन्टरनेट आधुनिक सदी का ऐसा ताना-बाना है, जो अपनी स्वच्छन्द गति से पूरी दुनिया को अपने आगोश में लेता जा रहा है। कोई सीमा इसे रोक नहीं सकती। यह एक ऐसा तंत्र है, जिस पर किसी एक संस्था या व्यक्ति या देश का अधिकार नहीं है बल्कि सेवा प्रदाताओं और उपभोक्ताओं की सामूहिक सम्पत्ति है। इन्टरनेट सभी संचार माध्यमों का समन्वित एक नया रूप है। पत्र-पत्रिका, रेडियो और टेलीविजन ने सूचनाओं के आदान-प्रदान के रूप में जिस सूचना क्रांति का प्रवर्तन किया था, आज इन्टरनेट के विकास के कारण यह विस्फोट की स्थिति में हैं। इन्टरनेट के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान एवं संवाद आज दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक पलक झपकते संभव हो चुका है।
इन्टरनेट पर आज पत्र-पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही हैं, रेडियो के चैनल उपलब्ध हैं और टेलीविजन के लगभग सभी चैनल भी मौजूद हैं। इन्टरनेट से हमें व्यक्ति, संस्था, उत्पादों, शोध आंकड़ों आदि के बारे में जानकारी मिल सकती है। इन्टरनेट के विश्वव्यापी जाल (www) पर सुगमता से अधिकतम सूचनाएँ प्राप्त की जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त यदि अपने पास ऐसी कोई सूचना है जिसे हम सम्पूर्ण दुनिया में प्रसारित करना चाहें तो उसका हम घर बैठे इन्टरनेट के माध्यम से वैश्विक स्तर पर विज्ञापन कर सकते हैं। हम अपने और अपनी संस्था तथा उसकी गतिविधियों, विशेषताओं आदि के बारे में इन्टरनेट पर अपना होमपेज बनाकर छोड़ सकते हैं। इन्टरनेट पर पाठ्यसामग्री, प्रतिवेदन, लेख, कम्प्यूटर कार्यक्रम और प्रदर्शन आदि सभी कुछ कर सकते हैं। दूरवर्ती शिक्षा की इन्टरनेट पर असीम संभावनाएं हैं।
इन्टरनेट की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भी अहम् भूमिका है। विभिन्न प्रकार के सर्वेक्षण एवं जनमत संग्रह इन्टरनेट के द्वारा भली-भाँति हो सकते हैं। आज सरकार को जन-जन तक पहुंचने के लिए ई-गवर्नेस की चर्चा हो रही है। व्यापार के क्षेत्र में इन्टरनेट के कारण कई संभावनाओं के द्वार खुले हैं। आज दुनिया भर में अपने उत्पादों और सेवाओं का विज्ञापन एवं संचालन अत्यंत कम मूल्य पर इन्टरनेट द्वारा संभव हुआ है। आज इसी संदर्भ में वाणिज्य के एक नए आयाम ई-कॉमर्स की चर्चा चल रही है। इन्टरनेट सूचना, शिक्षा और मनोरंजन की त्रिवेणी है। यह एक अन्तःक्रिया का बेहतर और सर्वाधिक सस्ता माध्यम है। आज इन्टरनेट कल्पना से परे के संसार को धरती पर साकार करने में सक्षम हो रहा है। जो बातें हम पुराण और मिथकों में सुनते थे और उसे अविश्वसनीय और हास्यास्पद समझते थे वे सभी आज इन्टरनेट की दुनिया में सच होते दिख रहे हैं। टेली मेडिसिन एवं टेली ऑपरेशन आदि इन्टरनेट के द्वारा ही संभव हो सके हैं।
(iii) बेरोज़गारी की समस्या
उत्तर:
बेरोज़गारी का अर्थ है, काम चाहनेवाले व्यक्ति को कार्यक्षमता रहते हुए भी काम न मिलना। बेरोज़गारी के कारण राष्ट्रों का सर्वांगीण विकास नहीं हो पा रहा है, जिससे वे त्रस्त हैं। भारत में बेरोज़गारी की समस्या कुछ ज़्यादा ही गंभीर है। भारत के गाँव, शहर तथा शिक्षित अशिक्षित सभी इस समस्या से ग्रस्त है।
अब बेरोज़गारी की समस्या के कारण और निवारण । दोनों पर दृष्टिपात करना आवश्यक है। जनसंख्या वृद्धि, कृषि पर अधिक भार, प्राकृतिक प्रकोप, मशीनीकरण एवं दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली बेरोज़गारी के मूल कारण है। भारत में उत्पादन एवं रोज़गार वृद्धि पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। फलतः बेरोज़गारों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
बेरोज़गारी की समस्या दूर करने के लिए शिक्षा एवं परिवार नियोजन की सहायता से जनसंख्या वृद्धि की दर घटाना आवश्यक है। भारत की आबादी का 60 प्रतिशत भाग कृषि पर निर्भर है। इधर जनसंख्या वृद्धि के कारण कृषि भूमि में दिनों-दिन कमी हो रही है। इसके कारण भी बेरोज़गारी की संख्या में इजाफा हो रहा है। भारतीय किसानों को प्राकृतिक प्रकोपों का भी सामना करना पड़ता है। कभी अतिवृष्टि तो कभी अनावृष्टि । इससे लोग बेकार हो जाते हैं। अतः इस समस्या के समाधान हेतु सहकारिता एवं वैज्ञानिक उपाय खेती के लिए अपनाने होंगे। वर्तमान युग तो मशीनों का युग है। इन मशीनों ने उद्योगों में लगे लाखों मज़दरों के नौकरी छीनकर उन्हें बेकारों की पंक्ति में खड़ा कर दिया है। इ३, कारणवश हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने मशीनीकरण का विरोध किया था। इससे छुटकारा पाने के लिए गाँवों तथा शहरों में कुटीर उद्योगों का जाल फैलाना होगा। वर्तमान शिक्षा प्रणाली में आमूल परिवर्तन लाकर ही इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके लिए व्यावहारिक शिक्षा प्रणाली अपनानी होगी, जिससे ज्ञानी मस्तिष्क के साथ-साथ कुशल हाथ भी निकले अर्थात् शिक्षा को रोज़गारोन्मुखी बनाया जाए। साथ ही साथ लोगों में नौकरी परस्ती की प्रवृत्ति के बजाय रोज़गार परक प्रवृत्ति जागृत करनी होगी।
बेरोज़गारी का दुष्प्रभाव प्रकारांतर से समाज पर पड़ता है जिससे समाज अनेक समस्याओं से ग्रस्त हो जाता है। खासकर शिक्षित बेरोज़गार युवकों’ का मस्तिष्क रचनात्मक न रहकर विध्वंससात्मक हो जाता है। समाज में आश्चर्यचकित करनेवाले अपराध हो रहे हैं जो बेरोज़गारों के मस्तिष्क की उपज हैं। अशिक्षितों के बेरोज़गार रहने से उतनी गंभीर समस्या उत्पन्न नहीं होती-जितनी गंभीर समस्या शिक्षित बेरोज़गारों से उत्पन्न होती है।
(आ) 48. निम्नालाखत अनुच्छेद पाटकर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए। ( 5 x 1 = 5 )
फिजूलखर्ची एक बुराई है, लेकिन ज्यादातर मौकों पर हम इसे भोग, अय्याशी से जोड़ लेते हैं। फिजूलखर्ची के पीछे बारीकी से नज़र डालें तो अहंकार नज़र आएगा। अहंकार को प्रदर्शन से तृप्ति मिलती है। अहं की पूर्ति के लिए कई बार बुराइयों से रिश्ता भी जोड़ना पड़ता है। अहंकारी लोग बाहर से भले ही गंभीरता का आवरण ओढ़ लें, लेकिन भीतर से वे उथलेपन और छिछोरेपन से भरे रहते हैं। जब कभी समुद्र तट पर जाने का मौका मिले तो देखिएगा लहरें आती हैं, जाती हैं और यदि चट्टानों से टकराती हैं तो पत्थर वहीं रहते हैं, लहरें उन्हें भिगोकर लौट जाती हैं। हमारे भीतर हमारे आवेगों की लहरें हमें ऐसे ही टक्कर देती हैं। इन आवेगों, आवेशों के प्रति अडिग रहने का अभ्यास करना होगा, क्योंकि अहंकार यदि लम्बे समय टिके रहे, तो वह नए-नए तरीके ढूँढेगा। अहंकार के कारण ही जीवन का आनन्द खो जाता है। इसलिए प्रयास करें कि विनम्र और निरहंकारी बने रहें।
प्रश्नः 1.
फिजूलखर्ची को किसके साथ जोड़ लेते हैं ?
उत्तर:
फिजूलखर्ची को भोग, अय्याशी से जोड़ लेते हैं।
प्रश्नः 2.
अहं की पूर्ति के लिए क्या करना पड़ता है?
उत्तर:
अहं की पूर्ति के लिए कई बार बुराइयों से रिश्ता भी जोड़ना पड़ता है।
प्रश्नः 3.
अहंकारी लोग भीतर से कैसे रहते हैं?
उत्तर:
अहंकारी लोग भीतर से उथलेपन और छिछोरेपन से भरे रहते हैं।
प्रश्नः 4.
समुद्र तट पर जाने से क्या देखने को मिलेगा?
उत्तर:
समुद्र तट पर जाने से हम यह देख सकते हैं – लहरें आती हैं, जाती हैं और यदि चट्टानों से टकराती हैं तो पत्थर वहीं रहते हैं. लहरें उन्हें भिगोकर लौट जाती हैं।
प्रश्नः 5.
जीवन का आनंद क्यों खो जाता है?
उत्तर:
अहंकार के कारण ही जीवन का आनन्द खो जाता है ।
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49. (इ) हिन्दी में अनुवाद कीजिए। ( 5 x 1 = 5 )
