KSEEB Solutions for Class 10 Hindi वल्लरी Chapter 14 सूर-श्याम

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Karnataka State Syllabus Class 10 Hindi वल्लरी Chapter 14 सूर-श्याम

सूर-श्याम Questions and Answers, Summary, Notes

अभ्यास

I. एक वाक्य में उत्तर लिखिए :

प्रश्न 1.
‘सूर-श्याम’ पद के रचयिता कौन हैं?
उत्तर:
‘सूर-श्याम’ पद के रचयिता सूरदास जी हैं।

प्रश्न 2.
कृष्ण की शिकायत किसके प्रति है?
उत्तर:
कृष्ण की शिकायत बड़े भाई बलराम के प्रति है।

प्रश्न 3.
यशोदा और नंद का रंग कैसा था?
उत्तर:
यशोदा और नंद का रंग गोरा था।

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प्रश्न 4.
चुटकी दे-देकर हँसनेवाले कौन थे?
उत्तर:
चुटकी दे-देकर हँसनेवाले ग्वाल-बाल थे।

प्रश्न 5.
यशोदा किसकी कसम खाती है?
अथवा
गोधन की कसम कौन खाता है?
उत्तर:
यशोदा गोधन की कसम खाती है।

प्रश्न 6.
बालकृष्ण किससे शिकायत करता है?
उत्तर:
बालकृष्ण माता यशोदा से शिकायत करता है।

प्रश्न 7.
बलराम के अनुसार किसे मोल लिया गया है?
उत्तर:
बलराम के अनुसार कृष्ण को मोल लिया गया है।

प्रश्न 8.
बालकृष्ण का रंग कैसा था?
उत्तर:
बालकृष्ण का रंग स्याम या काला है।

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 9.
ग्वाले चुटकी देकर क्यों हँसते थे?
उत्तर:
बलदाऊ द्वारा कृष्ण को चिढ़ाने से सभी ग्वाले चुटकी देकर हँसते थे।

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प्रश्न 10.
बलराम, कृष्ण को क्या कहकर चिढ़ाता था?
उत्तर:
बलराम, कृष्ण को श्याम (काला) कहकर चिढ़ाता था।

प्रश्न 11.
यशोदा और नंद का रंग कैसा था?
उत्तर:
यशोदा और नंद का रंग गोरा था।

प्रश्न 12.
बालकृष्ण का रंग कैसा था?
उत्तर:
बालकृष्ण का रंग स्याम (काला) था।

प्रश्न 13.
बलराम के अनुसार किसे मोल लिया गया है?
उत्तर:
बलराम के अनुसार कृष्ण को मोल लिया गया है।

प्रश्न 14.
बलराम कृष्ण को बार-बार क्या पूछता था?
उत्तर:
बलराम कृष्ण को बार-बार पूछता था कि तुम्हारी माता कौन है और तुम्हारे पिता कौन है।

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प्रश्न 15.
कृष्ण के अनुसार माता यशोदा ने क्या सीखा है?
उत्तर:
कृष्ण के अनुसार माता यशोदा ने सिर्फ उन्हें मारना सीखा है।

प्रश्न 16.
यशोदा गोधन की कसम क्यों खाती है?
उत्तर:
यशोदा कृष्ण को यह विश्वास दिलाने के लिए गोधन की कसम खाती है कि वही कृष्ण की माँ है।

II. दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए :

प्रश्न 1.
कृष्ण, बलराम के साथ खेलने क्यों नहीं जाना चाहता?
अथवा
कृष्ण, बलराम के प्रति क्यों नाराज़ है?
उत्तर:
बलराम कृष्ण को चिढ़ाता है। वह कृष्ण से कहता है कि यशोदा ने उसे जन्म नहीं दिया है। इसे मोल लिया है। इस गुस्से के कारण कृष्ण बलराम के साथ खेलने नहीं जाना चाहता है।

प्रश्न 2.
बलराम कृष्ण के माता-पिता के बारे में क्या कहता है?
उत्तर:
बलराम कृष्ण के माता-पिता के बारे में कहता है कि यशोदा और नंद तुम्हारे माता-पिता नहीं है। यशोदा और नंद का रंग गोरा हैं। तुम्हारा रंग काला है। तुझे उन्होंने मोल लिया है। वास्तव में यशोदा और नंद कृष्ण के माता-पिता ही नहीं है।

प्रश्न 3.
कृष्ण अपनी माता यशोदा के प्रति क्यों नाराज है?
उत्तर:
कृष्ण अपनी माता यशोदा से इसलिए नाराज है कि वह केवल उसे ही मारती है और बड़े भाई बलराम को गुस्सा तक नहीं करती। वह सिर्फ बलराम से प्यार करती है।

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प्रश्न 4.
बालकृष्ण अपनी माता से क्या-क्या शिकायतें करता है?
उत्तर:
बालकृष्ण अपनी माता से शिकायते करता है कि भाई मुझे बहुत चिढाता है। कहता है कि तुम्हे यशोदा | माता ने जन्म नहीं दिया है। वह यह भी कहता है कि नंद और यशोदा तो गोरे है, लेकिन तुम तो काले हो।

प्रश्न 5.
यशोदा कृष्ण के क्रोध को कैसे शांत करती है?
अथवा
माता यशोदा कृष्ण की नाराजगी कैसे दूर करती हैं?
उत्तर:
कृष्ण के क्रोधयुक्त चेहरे को देखकर, उसकी बातों को सुनकर यशोदा खुश हो जाती है। वह कृष्ण से कहती है कि बलराम जन्म से ही धूर्त है, चुगलखोर है। वह गोधन की सौगंध खाकर कहती है कि वह ही उसकी माता और कृष्ण ही उसका पुत्र है।

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर:

प्रश्न 6.
यशोदा ने अपने बेटे कृष्ण को कैसे सांत्वना दी?
उत्तर:
यशोदा कृष्ण से कहती है कि बलराम जन्म से ही चुगलखोर है। मैं गोमाता की सौगंध खाकर कहती हूँ कि मैं ही तुम्हारी माता हूँ और तू ही मेरा पुत्र है। इस प्रकार कृष्ण को सांत्वना देती है।

प्रश्न 7.
यशोदा क्यों खुश हो जाती थी?
उत्तर:
कृष्ण जब यशोदा मैया से बलराम की शिकायत करते हैं तब कृष्ण की मीठी-मीठी और भोली बातों को सुनकर माता यशोदा को हँसी आ जाती है। कृष्ण को गले से लिपटाकर कहती हैं ‘गौमाता की सौगंध तुम्ही मेरे पुत्र हो। इस प्रकार माता यशोदा बालक कृष्ण की बातें सुनकर और उसके क्रोधयुक्त मुख को देखकर खुश हो जाती थीं।

प्रश्न 8.
यशोदा कृष्ण को किस प्रकार सांत्वना देती है?
अथवा
यशोदा, कृष्ण को कैसे मनाती है?
उत्तर:
कृष्ण की क्रोधभरी बातों को सुनकर यशोदा कृष्ण को सांत्वना देते हुए कहती है कि बलराम बचपन से ही चुगलखोर है। वह गोधन की सौगंध खाकर कहती हैं कि वही उसकी माता हूँ और कृष्ण ही उसका पुत्र है।

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प्रश्न 9.
बालकृष्ण के अनुसार यशोदा ने क्या सीखा है?
उत्तर:
बालकृष्ण के अनुसार माता यशोदा ने सिर्फ उन्हें मारना सीखा है। बलराम के बार-बार गलती करने पर भी वह उन पर गुस्सा नहीं करती है।

III. चार-छ:/सात-आठ वाक्यों में उत्तर लिखिए :

प्रश्न 1.
‘सूर-श्याम’ पद का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
‘सूर-श्याम’ पद में कृष्ण अपनी माता के सम्मुख अपने बड़े भाई बलराम की शिकायत करते हुए कहते हैं कि हे माँ, बलराम मुझे बहुत चिढ़ाता है और कहता है कि तू नंद-यशोदा का पुत्र नहीं है, पद में कुछ जानकी माता के समय अपने ले आई बलराम की शिवाग्रत हो तू तो मोल का लाया हुआ है। वे तो गोरे हैं और तू काला कैसे? हे माँ, इसी कारण मैं उसके साथ खेलने नहीं जाता। अन्य सखाओं को भी वह मुझे चिढ़ाने के लिए सिखाता है। तू मात्र मुझे ही मारना सीखी है, दाऊ को कभी डाँटती तक नहीं। कृष्ण की इन भोली-भाली बातों को सुनकर, क्रोधित चेहरे को देखकर यशोदा हँस देती है और कृष्ण का समाधान करने के लिए कहती है कि – “मैं गोधन की सौगंध खाकर कहती हूँ कि मैं ही तुम्हारी माता हूँ, तुम ही मेरे पुत्र हो।”

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर:

प्रश्न 2.
श्रीकृष्ण अपनी माँ से क्या शिकायत करते है?
उत्तर:
‘सूर-श्याम’ पद में कृष्ण अपनी माता के सम्मुख अपने बड़े भाई बलराम की शिकायत करते हुए कहते हैं कि हे माँ, बलराम मुझे बहुत चिढ़ाता है और कहता है कि तू नंद-यशोदा का पुत्र नहीं है, पद में कुछ जानकी माता के समय अपने ले आई बलराम की शिवाग्रत हो तू तो मोल का लाया हुआ है। वे तो गोरे हैं और तू काला कैसे? हे माँ, इसी कारण मैं उसके साथ खेलने नहीं जाता। अन्य सखाओं को भी वह मुझे चिढ़ाने के लिए सिखाता है। तू मात्र मुझे ही मारना सीखी है, दाऊ को कभी डाँटती तक नहीं। कृष्ण की इन भोली-भाली बातों को सुनकर, क्रोधित चेहरे को देखकर यशोदा हँस देती है और कृष्ण का समाधान करने के लिए कहती है कि – “मैं गोधन की सौगंध खाकर कहती हूँ कि मैं ही तुम्हारी माता हूँ, तुम ही मेरे पुत्र हो।”

भावार्थ लिखिए :

प्रश्न 1.
कहा कहौं इहि रिस के मारे, खेलन हौं नहिं जात।
पुनि पुनि कहत कौन है माता, को है तुमरो तात॥
उत्तर:
इन पंक्तियों को ‘सूर-श्याम’ कविता से लिया गया है। यहाँ कवि सूरदास कृष्ण की बाल लीला का वर्णन कर रहैं हैं। प्रस्तुत पंक्तियों में बालक कृष्ण अपनी माता यशोदा से बलराम की शिकायत करते हुए कह रहें हैं – भैया बलराम बार-बार पूछते हैं कि तुम्हारी माता कौन है और तुम्हारे पिता कौन हैं। वह मुझे बहुत चिढ़ाता हैं। इसलिए मुझे उससे खेलने नहीं जाना।

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प्रश्न 2.
गोरे नंद जसोदा गोरी, तुम कत स्याम सरीर।
चुटकी दै दै हँसत ग्वाल, सब सिखै देत बलबीर ॥
उत्तर:
इन पंक्तियों को ‘सूर-श्याम’ कविता से लिया गया है। यहाँ कवि सूरदास कृष्ण की बाल लीला का वर्णन कर रहैं हैं। उपर्युक्त पंक्तियों में सूरदास जी बालक कृष्ण की शिकायत का वर्णन कर रहे हैं। बाल कृष्ण अपनी माता यशोदा से कह रहा है कि, भाई बलराम मुझसे कहते हैं कि माता यशोदा गोरी है और नंदराज भी गोरे हैं। मगर तुम क्यों काले हो? जब बलराम ऐसे चिढ़ाते हैं तो सारे ग्वाला मित्र चुटकी बजा-बजाकर हँसते हैं।

प्रश्न 3.
तू मोहिं को मारन सीखी दाउहि कबहुँ न खीझै।
मोहन को मुख रिस समेत लखि, जसुमति सुनि सुनि रीझै॥
उत्तर:
इन पंक्तियों को ‘सूर-श्याम’ कविता से लिया गया है। यहाँ कवि सूरदास कृष्ण की बाल लीला का वर्णन कर रहैं हैं। उपर्युक्त पंक्तियों में कृष्ण यशोदा से शिकायत करते हुए कह रहा है कि, बलराम मुझे कितना भी छिढ़ाए, कितना भी सताए तुम तो मुझे ही मारती हो, भाई बलराम को कभी नहीं डाँटती। जब वह यह शिकायत कर रहा होता है उस समय कृष्ण के गुस्से से भरे मुग्ध मुख को देखकर यशोदा मन ही मन हस्ती हैं।

प्रश्न 4.
सुनहु कान्ह बलभद्र चबाई जनमत ही को धूत।
‘सूर’ स्याम मोहिं गोधन की सौं हौं माता तू पूत ॥
उत्तर:
इन पंक्तियों को ‘सूर-श्याम’ कविता से लिया गया है। यहाँ कवि सूरदास कृष्ण की बाल लीला का वर्णन कर रहैं हैं। इन पंक्तियों में कवि सूरदास यशोदा के प्रेम को दर्शाते हुए कह रहे हैं – जब कृष्ण बलराम की ढेर सारी शिकायत करता है तो यशोदा सुनकर मन ही मन मुस्कुराती है और अपने बाल कृष्ण को मनाते हुए कहती है कि, सुनो कृष्ण, बलराम तो जन्म से ही चुगलखोर है। मुझे गोधन (गाय) की सौगंध है, अर्थात मैं गो माता की कसम खाकर कहती हूँ कि तुम ही मेरे पुत्र हो और मैं ही तुम्हारी माता हूँ।

IV. पद्यभाग पूर्ण कीजिए :

1) गोरे नंद ___________ सरीर।
___________________ बलबीर॥
उत्तर:
गोरे नंद जसोदा गोरी, तुम कत स्याम सरीर।
चुटकी दै दै हँसत ग्वाल, सब सिखै देत बलबीर ॥

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2) सुनहु कान्ह ___________ ।
__________________ तू पूत॥
उत्तर:
सुनहु कान्ह बलभद्र चबाई जनमत ही को धूत।
‘सूर’ स्याम मोहिं गोधन की सौं हौं माता तू पूत ॥

V. अनुरूपता:

  1. बलभद्र : बलराम : : कान्ह : _________
  2. जसोदा : माता : : नंद : _________
  3. रीझना : मोहित होना : : खिजाना : __________
  4. बलबीर : बलराम : : जसोदा : ___________

उत्तरः

  1. कृष्ण;
  2. पिता;
  3. चिढ़ाना;
  4. जसुमति।

VI. जोड़कर लिखिए :

अ – ब
1) सूरदास का जन्म – अ) कृष्णभक्ति शाखा
2) सगुण भक्तिधारा की – आ) सन् 1540 को हुआ
3) उत्तर प्रदेश का रुनकता – इ) सन् 1642 को हुई
4) सूरदास जी की मृत्यु – ई) सूर का जन्मस्थान
उत्तरः
1. आ;
2. अ;
3. ई;
4. इ।

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VII. सही शब्द चुनकर लिखिए :

(चुगलखोर, गोरी, श्याम, चुटकी, बाल-लीला)

  1. जसोदा
  2. कृष्ण
  3. ग्वाल मित्र
  4. बलराम
  5. कृष्ण की

उत्तरः

  1. गोरी;
  2. श्याम;
  3. चुटकी;
  4. चुगलखोर;
  5. बाललीला।

VIII. आधुनिक रूप लिखिए :

उदाः मैया – माता

  1. मोहिं – ________
  2. मोसों – ________
  3. रिस – ________
  4. सरीर – ________
  5. सिखै – ________
  6. जसुमति – ________
  7. धूत – ________
  8. कान्ह – ________
  9. पूत – ________
  10. जनमत – ________

उत्तरः

  1. मोहिं – पुझे
  2. मोसों – मुझसे
  3. रिस – क्रोध
  4. सरीर – शरीर
  5. सिखै – सिखाना
  6. जसुमति – यशोदा
  7. धूत – दुष्ट
  8. कान्ह – कृष्ण
  9. पूत – पुत्र
  10. जनमत – जन्म

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पद से आगे

I. चित्र देखकर एक कहानी रचिए और उसके लिए एक उचित शीर्षक दीजिए।
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उत्तर:
शीर्षक : बाल-हठ।
कहते हैं बच्चे बड़े हटवादी होते हैं। उठने, बैठने, खाने-पीने, नहाने, सोने आदि के लिए भी बच्चों का हठ माता को बड़ा ही परेशान करनेवाला होता है। फिर भी माता बेचारी बच्चों का पालन-पोषण बड़े ही मनोयोग से करती है।

एक दिन की बात है। रागिनी अपने पुत्र मनोहर को भोजन कराना चाहती थी। मनोहर मात्र किसी भी हालत में भोजन करने के लिए तैयार नहीं है। रागिनी उसे जैसे-तैसे समझाने की कोशिश करती है, पर मनोहर टस-से-मस नहीं होता। वह हाथ-पैर पटकता है, रोता है, चिल्लाता है; पर खाता कुछ नहीं। रागिनी गाना गाती है, खिलौना दिखाती है, गेंद देती है। फिर भी मनोहर एक कौर भी खाने को तैयार नहीं।

रागिनी प्रति दिन की भाँति आज भी प्रांगण में आ गई। आकाश में चाँद दिखाई दिया। उसने मनोहर से कहा – “देखो, चंदामामा! कितना अच्छा लग रहा है।’ सुनते ही मनोहर ने रोना बंद कर दिया। फिर रागिनी गाने लगी – “चंदा आ जा रे, मेरे मन्नु को खिला जा रे, चंदा आ जा रे।” कहते-कहते मनोहर को खिचड़ी खिलाने लगी और मनोहर भी अब धीरे-धीरे एक-एक कौर ‘चंदा’ की ओर देखते हुए खाने लगा। यह क्रम कुछ समय चलता रहा। इस प्रकार बच्चों के हठ को मिटाने की कोशिश करनी पड़ती है।

सूर-श्याम Summary in Hindi

सूर-श्याम कवि परिचय :
सूरदास (सन् 1540-1642): भक्त कवि सूरदास हिन्दी साहित्याकाश के सूर्य माने जाते हैं। इन्हें भक्तिकाल की सगुण भक्तिधारा की कृष्णभक्ति-शाखा का प्रवर्तक माना जाता है। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के रुनकता गाँव में सन् 1540 को हुआ था। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – ‘सूरसागर’, ‘सूरसारावली’ एवं ‘साहित्यलहरी’। इनकी मृत्यु सन् 1642 को हुई। इनके काव्यों में वात्सल्य, श्रृंगार तथा भक्ति का त्रिवेणी संगम हुआ है।

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पद का आशय :
बच्चे स्वभाव से भोले होते हैं। वे हमेशा अपने माता-पिता से अपने भाई, बहन और मित्रों की कुछ-न-कुछ शिकायत करते रहते हैं। उनका बाल सहज स्वभाव देखकर बड़ों को हँसी आती है और उन्हें पुचकारकर सांत्वना देते हैं। माँ और बेटे के ऐसे सहज संबंध की कल्पना कर सूरदास जी ने अपने इस पद में उसका सुन्दर चित्रण किया है।

पद का सारांश :
सूरदास जी ने प्रस्तुत पद में कृष्ण की बाल-लीला का बड़ा ही मार्मिक चित्रण किया है। कृष्ण माता से अपने बड़े भाई बलराम की शिकायत करते हुए कहते हैं कि हे माँ, बड़ा भैया मुझे सदा चिढ़ाता रहता है और अन्य सखाओं को भी सिखाता है। “तेरे माता-पिता गोरे हैं, तू काला क्यों? वे तेरे मातापिता नहीं हैं,” जैसी बातें कहकर मुझे नाराज करता है और तू जो है, सदा मुझे ही डाँटती है, बलदाऊ को कुछ नहीं कहती। इसीलिए मैं खेलने नहीं जाता।

सूर-श्याम Summary in Hindi

कृष्ण की इन मीठी-मीठी और भोली बातों को सुनकर माता यशोदा को हँसी आ जाती है। वह अपने लाल को गले से लिपटाकर कहती है – “मैं गौमाता की सौगंध खाकर कहती हूँ कि मैं ही तुम्हारी माता हूँ और तू ही मेरा पुत्र है।”

सूर-श्याम Summary in Kannada

सूर-श्याम Summary in Kannada 1

सूर-श्याम Summary in Kannada 2

सूर-श्याम Summary in English

The devotional poet Surdas is one of the leading figures of medieval Hindi poetry. He is considered the leading exponent of the Krishna-Bhakt sect, from the Bhakti era in Hindi poetry. In this following poem, Surdas beautifully describes the childhood of Lord Krishna, and the complaints he makes to his mother Yashoda.

The first verse describes the complaint that little Krishna makes to his mother. He tells his mother, Yashoda, that his brother Balram teases him a lot. Balram teases Krishna telling him that he was not born to Yashoda, but actually adopted by her.

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In the second verse, Krishna says that he does not go out to play with Balram because he is angered by Balram’s taunts. Balram keeps asking him who his mother and father are. Krishna feels insulted by this and complains to Yashoda.

In the third verse, Krishna says that Balram asks him how he is dark-skinned when both Yashoda and Nanda (Krishna’s parents) are fair-skinned. Balram tries to imply that Krishna was not born to Yashoda and Nanda. Krishna complains that Balram has taught all the other young boys to tease him in this manner.

In the fourth verse, Krishna tells Yashoda that she has only learned to punish him, but does not ever get angry at Balram. While she observes Krishna’s angry face and hears him speak thus, Yashoda secretly feels happy.

In the fifth verse, Yashoda finally replies to Krishna’s complaints. She asks Krishna to listen and tells him that Balram has been a backbiter right from his childhood. She swears on her cattle, that she is his mother and that he is her son.

पद का भावार्थ :

1) मैया मोहिं दाऊ बहुत खिझायो।
मोसों कहत मोल को लीनो, तोहि जसुमति कब जायो ।।

इस पंक्तियों में भाई बलराम के प्रति कृष्ण की शिकायत का मोहक वर्णन किया गया है। कृष्ण अपनी माँ यशोदा से शिकायत करता है कि भाई मुझे बहुत चिढ़ाता है। वह मुझसे कहता है कि तुम्हें यशोदा माँ ने जन्म नहीं दिया है बल्कि मोल लिया है।

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2) कहा कहौं इहि रिस के मारे, खेलन हौं नहिं जात।
पुनि पुनि कहत कौन है माता, को है तुमरो तात ॥

इसी गुस्से के कारण उसके साथ मैं खेलने नहीं जाता। वह मुझसे बार-बार पूछता है कि तुम्हारे माता-पिता कौन हैं?

3) गोरे नंद जसोदा गोरी, तुम कत स्याम सरीर।
चुटकी दै दै हँसत ग्वाल, सब सिखै देत बलबीर ॥

वह यह भी कहता है कि नंद और यशोदा तो गोरे हैं, लेकिन तुम्हारा शरीर क्यों काला है? उसकी ऐसी हँसी-मज़ाक सुनकर मेरे सब ग्वाल मित्र चुटकी बजा-बजाकर हँसते हैं। उन्हें बलराम ने ही ऐसा करना सिखाया है।

4) तू मोहिं को मारन सीखी दाउहि कबहुँ न खीझै।
मोहन को मुख रिस समेत लखि, जसुमति सुनि सुनि रीझै ॥

माँ, तुमने केवल मुझे ही मारना सीखा है और भाई पर कभी गुस्सा नहीं करती। (अपने भाई के प्रति क्रोधित और सखाओं द्वारा अपमानित) कृष्ण के क्रोधयुत मुख को देखकर और उसकी बातों को सुनकर यशोदा खुश हो जाती है।

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5) सुनहु कान्ह बलभद्र चबाई जनमत ही को धूत।
‘सूर’ स्याम मोहिं गोधन की सौं हौं माता तू पूत ॥

यशोदा कहती है – हे कृष्ण! सुनो। बलराम जन्म से ही चुगलखोर है। मैं गौ माता की कसम खाकर कहती हूँ, मैं ही तेरी माता हूँ और तुम मेरे पुत्र हो।
इस पद में सूरदास ने बालकृष्ण के भोलेपन और यशोदा के वात्सल्य का मार्मिक चित्रण किया है।

शब्दार्थ :

  • मैया – माँ;
  • मोहिं – मुझे;
  • दाऊ – भैया (बलराम);
  • खिझाना – चिढ़ाना;
  • मोसों – मुझसे;
  • मोल – मूल्य, दाम;
  • तोहि – तुझे;
  • जसुमति – जसोदा, यशोदा;
  • जायो – जन्म दिया;
  • रिस – क्रोध;
  • के मारे – के कारण;
  • तुमरो – तुम्हारे;
  • तात – पिता;
  • कत – क्यों;
  • स्याम – काला;
  • ग्वाल – गोपालक;
  • सिखै – सिखाना;
  • बलभद्र – बलबीर, बलराम;
  • रीझै – मोहित होना;
  • सुनहु – सुनो;
  • कान्ह – कृष्ण;
  • चबाई – पीठ पीछे बुराई करनेवाला, चुगलखोर;
  • जनमत ही – जन्म से ही;
  • धूत – धृष्ट (धूर्त);
  • लखि – देखकर;
  • सौं – कसम, सौगंध;
  • हौं – मैं;
  • पूत – पुत्र।
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