KSEEB Solutions for Class 10 Hindi वल्लरी Chapter 9 ईमानदारों के सम्मेलन में

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Karnataka State Syllabus Class 10 Hindi वल्लरी Chapter 9 ईमानदारों के सम्मेलन में

ईमानदारों के सम्मेलन में Questions and Answers, Summary, Notes

अभ्यास

I. एक वाक्य में उत्तर लिखिए:

प्रश्न 1.
प्रस्तुत कहानी के लेखक कौन हैं?
उत्तर:
प्रस्ततु कहानी (निबंध) के लेखक हरिशंकर परसाई हैं।

प्रश्न 2.
लेखक दूसरे दर्जे में क्यों सफर करना चाहते थे?
उत्तर:
लेखक पहले दर्जे का किराया लेकर दूसरे दर्जे में सफर करके पैसा बचाना चाहते थे।

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प्रश्न 3.
लेखक की चप्पलें किसने पहनी थीं?
उत्तर:
लेखक की चप्पलें उन्हीं के कमरे वाले डेलीगेट ने पहनी थीं।

प्रश्न 4.
स्वागत समिति के मंत्री किसको डाँटने लगे?
उत्तर:
स्वागत समिति के मंत्री कार्यकर्ताओं को डाँटने लगे।

प्रश्न 5.
लेखक पहनने के कपड़े कहाँ दबाकर सोये?
उत्तर:
लेखक पहनने के कपड़े सिरहाने दबाकर सोये।

प्रश्न 6.
सम्मेलन में लेखक के भाग लेने से किन-किन को प्रेरणा मिल सकती थी?
उत्तर:
सम्मेलन में लेखक के भाग लेने से ईमानदारों तथा उदीयमान ईमानदारों को प्रेरणा मिल सकती थी।

प्रश्न 7.
लेखक को कहाँ ठहराया गया?
उत्तर:
लेखक को हो के एक बड़े कमरे में ठहराया गया।

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प्रश्न 8.
ब्रीफकेस में क्या था?
उत्तर:
ब्रीफकेस में कागजात थें।

प्रश्न 9.
लेखक ने धूप का चश्मा कहाँ रखा था?
उत्तर:
लेखक ने धूप का चश्मा मेज पर रखा था।

प्रश्न 10.
तीसरे दिन लेखक के कमरे से क्या गायब हो गया था?
उत्तर:
तीसरे दिन लेखक के कमरे से कम्बल गायब था।

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 11.
लेखक का रेल्वे स्टेशन पर कितनी फूल मालाओं से स्वागत हुआ?
उत्तर:
लेखक का रेल्वे स्टेशन पर दस फूल मालाओं से स्वागत हुआ।

प्रश्न 12.
होटल में कितने प्रतिनिधि ठहरे थे?
उत्तर:
होटल में लगभग तीस-पैंतीस प्रतिनिधि ठहरे थे।

प्रश्न 13.
लेखक को दूसरे दर्जे में जाने से कितने रुपये बचते थे?
उत्तर:
लेखक को दूसरे दर्जे में जाने से एक सौ पचास रुपये बचते थे।

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प्रश्न 14.
लेखक के पास सम्मेलन के अंत में क्या-क्या बचा?
उत्तर:
लेखक के पास एक जोड़ी नयी चप्पलें, सेविंग डिब्बा और अपने कपड़े बचे।

प्रश्न 15.
ईमानदारों के सम्मेलन में लेखक को क्यों आमंत्रित किया गया?
उत्तर:
सम्मेलन का उद्घाटन करने के लिए/ईमानदारों को प्रेरणा देने के लिए लेखक को सम्मेलन में आमंत्रित किया गया।

प्रश्न 16.
लेखक पहनने के कपडे सिरहाने दबाकर क्यों सोये?
उत्तर:
लेखक के कमरे से एक के बाद एक चीज गायब हो रही थी। लेखक के पास अपने कपड़े ही बचे थे। इसलिए रात को लेखक पहनने के कपड़े सिरहाने दबाकर सोये ताकी वह चुरा न जाए।

प्रश्न 17.
लेखक को स्टेशन पर माली की याद क्यों आई?
उत्तर:
लेखक को स्टेशन पर माली की याद फूल-मालाएँ बेचने के लिए आई।

प्रश्न 18.
लेखक परसाई जी ने कमरा छोड़कर जाने का निर्णय क्यों लिया?
उत्तर:
लेखक की सभी वस्तुएँ चोरी हो गयी थीं।

प्रश्न 19.
सम्मेलन में भाग लेने के लिए लेखक को क्या व्यवस्था की गई थी?
उत्तर:
सम्मेलन में भाग लेने के लिए लेखक को आने-जाने का पहले दर्जे का किराया, आवास तथा भोजन की व्यवस्था की गई थी।

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प्रश्न 20.
स्टेशन पर फूल-मालाएँ पहनाने पर लेखक ने क्या सोचा?
उत्तर:
स्टेशन पर फूल-मालाएँ पहनाने पर लेखक ने सोचा कि आस-पास कोई माली होता तो फूलमालाएँ बेच लेता।

II. दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए :

प्रश्न 1.
लेखक को भेजे गये निमंत्रण पत्र में क्या लिखा गया था?
उत्तर:
लेखक को भेजे गये निमंत्रण-पत्र में लिखा था – “हम लोग इस शहर में एक ईमानदार सम्मेलन कर रहे हैं। आप देश के प्रसिद्ध ईमानदार है। हमारी प्रार्थना है कि आप इस सम्मेलन का उद्घाटन करें। हम आपको आने-जाने का पहले दर्जे का किराया देंगे तथा आवास, भोजन आदि की उत्तम व्यवस्था करेंगे। आपके आगमन से ईमानदारों तथा उदीयमान ईमानदारों को प्रेरणा मिलेगी।”

प्रश्न 2.
फूल मालाएँ मिलने पर लेखक क्या सोचने लगे?
उत्तर:
फूल मालाएँ मिलने पर लेखक सोचने लगा कि – आस-पास कोई माली होता तो फूल-मालाएँ भी बेच लेता।

प्रश्न 3.
लेखक ने मंत्री को क्या समझाया?
उत्तर:
लेखक ने मंत्री को समझाया कि – ऐसा हरगिज मत करिए। ईमानदारी के सम्मेलन में पुलिस ईमानदारी की तलाशी ले यह बडी आशोभनीय बात होगी। फिर इतने बड़े सम्मेलन में थोडी गडबडी होगी ही।

प्रश्न 4.
चप्पलों की चोरी होने पर ईमानदार डेलीगेट ने क्या सुझाव दिया?
उत्तर:
चप्पलों की चोरी होने पर ईमानदार डेलीगेट ने कहा कि – “देखिए चप्पलें एक जगह नहीं उतारना चाहिए। एक चप्पल यहाँ उतारिए तो दूसरी दस फीट दूर। तब चप्पलें चोरी नहीं होतीं। एक ही जगह होगी तो कोई भी पहन लेगा। मैंने ऐसा ही किया था।”

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प्रश्न 5.
लेखक ने कमरा छोड़कर जाने का निर्णय क्यों लिया?
उत्तर:
लेखक ने कमरा छोडकर सीधा स्टेशन जाने का निर्णय लिया क्यों कि चीजें तो सब चुरा ली गयीं | थी। ताला तक चोरी में चला गया था। अब लेखक ही बचा था। वह सोचता है कि – अगर वह रुका तो वह भी चुरा लिया जायेगा।

प्रश्न 6.
मुख्य अतिथि की बेईमानी कहाँ दिखाई देती है?
अथवा
मुख्य अतिथि की बेईमानी कैसे व्यक्त हुई है?
उत्तर:
मुख्य अतिथी की बेईमानी यहाँ दिखाई देती है कि जहाँ वे सबकी तलाशी करवाना चाहता है और स्वागत समिती के साथ अच्छे होटल में खाना खाना चाहते हैं।

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर:

प्रश्न 7.
लेखक ईमानदारों के सम्मेलन के लिए दूसरे दर्जे में क्यों जाना चाहते थे?
उत्तर:
लेखक को ईमानदारों के सम्मेलन में जाना था। उस सम्मेलन के आयोजकों ने उन्हें पहले दर्जे का किराया देने की बात कही थी। पर लेखक दूसरे दर्जे में जाना चाहते थे, क्योंकि इससे एक सौ पचास रुपये बचते थे।

प्रश्न 8.
ईमानदारों के सम्मेलन में लेखक के कौन-कौन से सामान गायब हुए?
उत्तर:
सम्मेलन के पहले दिन लेखक की चप्पलें और एक चादर गायब हुई। दूसरे दिन दो और चादरें और चश्मा गायब हुए। तीसरे दिन ताला और कंबल गायब हुआ। इस तरह एक के बाद एक चीज़ गायब हो रही थी।

प्रश्न 9.
संदर्भ के साथ स्पष्ट करोः “अब मैं बचा हूँ। अगर रूका तो मैं ही चुरा लिया जाऊँगा।”
उत्तर:
ईमानदारों के सम्मेलन में लेखक की जब चप्पले, चादर, चश्मा तथा ताला और कंबल ही गायब हो गए तब वे नाराज होकर बिना स्वागत समिति के साथ भोजन कर जाने लगे। जब मंत्री ने उन्हें रूकने की प्रार्थना की तब वे कहने लगे “अब मैं बचा हूँ। अगर रूका तो मैं ही चुरा लिया जाऊँगा।”

III. चार-छः वाक्यों में उत्तर लिखिए :

प्रश्न 1.
लेखक के धूप का चश्मा खो जाने की घटना का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लेखक दूसरे दिन बैठक में जाने के लिए धूप का चश्मा खोजने लगे, तो नहीं मिला। चाय की छुट्टी में एक सज्जन आये। कहने लगे, “बड़ी चोरियाँ होने लगी हैं। देखिए, आपका धूप का चश्मा ही चला गया।’ यह धूप का चश्मा लगाये थे। पहले दिन यह उनके पास नहीं था। वह लेखक का ही चश्मा था। वह लेखक का चश्मा लगाये इतमीनान से बैठे थे।

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प्रश्न 2.
मंत्री तथा कार्यकर्ताओं के बीच में क्या वार्तालाप हुआ?
उत्तर:
मंत्री कार्यकर्ताओं को डाँटने लगे – “तुम लोग क्या करते हो? तुम्हारी ड्यूटी यहाँ है। तुम्हारे रहते चोरियाँ हो रही हैं। यह ईमानदारों का सम्मेलन है। बाहर यह चोरी की बात फैली, तो कितनी बदनामी होगी?” कार्यकर्ता ने कहा, “हम क्या करें? अगर सम्माननीय डेलीगेट यहाँ-वहाँ जायें, तो क्या हम उन्हें रोक सकते हैं?” तब मंत्री ने गुस्से में कहा, “मैं पुलिस को बुलाकर यहाँ सबकी तलाशी करवाता हूँ।” एक कार्यकर्ता ने कहा, “तलाशी किनकी करवायेंगे, आधे के लगभग डेलीगेट तो किराया लेकर दोपहर को ही वापस चले गये।”

प्रश्न 3.
सम्मेलन में लेखक को क्या-क्या अनुभव हुए? संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
लेखक ईमानदार सम्मेलन में मुख्य अतिथि के नाते आये थे। स्टेशन पर उनका भव्य स्वागत हुआ। उन्हें एक होटल के बड़े कमरे में ठहराया गया था। पहले-पहले उन्हें अपनी नई चप्पलें खोने का अनुभव हुआ। जिस डेलीगेट ने उनकी चप्पलें चुराई थी, वही महाशय लेखक को सुझाव देने लगे। कमरे से उनकी चादरें गायब थीं, उनका धूपवाला चश्मा गायब हुआ। किसी का ब्रीफकेस चला गया था। लेखक को अंतिम अनुभव यह हुआ कि उसके कमरे का ताला ही चुरा लिया गया।

IV. अनुरूपता:

  1. पहला दिन : चप्पलें गायब थीं : : दूसरे दिन : _________
  2. तीसरे दिन : कम्बल गायब था : : चौथे दिन : __________
  3. रिक्शा : तीन पहियों का वाहन : : साइकिल : __________
  4. रेलगाड़ी : पटरी : : हवाईजहाज : __________

उत्तरः

  1. चादरें गायब थीं;
  2. ताला गायब था;
  3. दो पहियों का वाहन;
  4. हवा मार्ग।

V. रिक्त स्थान भरिए :

  1. हम लोग इस शहर में एक _________ सम्मेलन कर रहे हैं।
  2. मेरी चप्पलें _________ थीं।
  3. वह मेरा चश्मा लगाये _________ से बैठे थे।
  4. फिर इतने बड़े सम्मेलन में थोड़ी __________ होगी ही।

उत्तरः

  1. ईमानदार;
  2. गायब;
  3. इतमीनान;
  4. गड़बड़ी।

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VI. विलोम शब्द लिखिए :

  1. आगमन × _________
  2. रात × _______
  3. जवाब × _______
  4. बेचना × ________
  5. सज्जन × ________

उत्तरः

  1. आगमन × निर्गमन
  2. रात × दिन
  3. जवाब × सवाल
  4. बेचना × खरीदना
  5. सज्जन × दुर्जन

VII. बहुवचन रूप लिखिए :

  1. कपड़ा – _________
  2. चादर – _________
  3. बात – __________
  4. डिब्बा – _________
  5. चीज़ – __________

उत्तरः

  1. कपड़ा – कपड़े
  2. चादर – चादरें
  3. बात – बातें
  4. डिब्बा – डिब्बे
  5. चीज़ – चीजें।

VIII. प्रेरणार्थक क्रिया रूप लिखिए :

  1. ठहरना – ________ – _________
  2. धोना – ________ – _________
  3. देखना – ________ – _________
  4. लौटना – ________ – _________
  5. उतरना – ________ – _________
  6. पहनना – ________ – _________

उत्तरः

  1. ठहरना – ठहराना – ठहरवाना
  2. धोना – धुलाना – धुलवाना
  3. देखना – दिखाना – दिखवाना
  4. लौटना – लौटाना – लौटवाना
  5. उतरना – उतारना – उतरवाना
  6. पहनना – पहनाना – पहनवाना

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IX. संधि-विच्छेद करके संधि का नाम लिखिए :

स्वागत, सहानुभूति, सज्जन, परोपकार, निश्चिंत, सदैव।

उत्तरः

  1. स्वागत = सु + आगत (यण संधि)
  2. सहानुभूति = सह + अनुभूति (दीर्घ संधि)
  3. सज्जन = सत् + जन (व्यंजन संधि)
  4. परोपकार = पर + उपकार (गुण संधि)
  5. निश्चिंत = निः + चिंत (विसर्ग संधि)
  6. सदैव = सदा + एव (वृद्धि संधि)

X. कन्नड या अंग्रेजी में अनुवाद कीजिए :

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XI. ईमान गुण के सामने सही चिह्न (✓) और बेईमान गुण के सामने गलत चिह्न (✗) लगाइए:

  1. दूसरे लोगों की वस्तुओं को वापिस पहुँचाना।
  2. चोरी करना।
  3. रास्ते में मिली वस्तुओं को पुलिस स्टेशन पहुंचाना।
  4. कामचोरी करना।
  5. बगल में छुरी मुँह में राम-राम करना।
  6. झूठ बोलना।
  7. नेक मार्ग पर चलना।
  8. जानबूझकर गलती करना।
  9. बहाना बनाना।
  10. सच बोलना।
  11. समय पर काम पूरा करना।
  12. धोखा देना।
  13. जालसाजी करना।
  14. चोर बाजारी और मिलावट करना।
  15. निष्ठा से कार्य करना।
  16. भ्रष्टाचार में शामिल होना।
  17. सेवाभाव से दूसरों की सहायता करना।
  18. देश के प्रति सच्चा अभिमान रखना।
  19. सच्चे भाव से बड़ों का आदर करना।
  20. अपने सहपाठियों के साथ भाईचारे का व्यवहार करना।

उत्तरः

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XII. चित्र देखकर कहानी रचिए, और उसके लिए एक उचित शीर्षक दीजिए :
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उत्तरः
शीर्षक : “ऑटो-चालक की ईमानदारी” अथवा “ईमानदार ऑटो-चालक”
कब्बनपेट में मुरलीधर नामक एक व्यक्ति है। उसका एक ऑटो है। वह प्रतिदिन ऑटो चलाकर अपना गुजारा करता है। मुरलीधर हमेशा अपने सवारियों से अच्छा बर्ताव करता है। किराए के लिए कभी किसी से वाद-विवाद नहीं करता।

आज वह मेजेस्टिक से राजाजीनगर जा रहा था। उसके ऑटों में एक पढ़ा लिखा बाबू सवार हुआ। उसके पास दो-तीन सामान थे। जब वह राजाजीनगर पहुंचा, तो गड़बड़ में दो सामान लेकर उतर गया और ऑटो-चालक को किराया देकर चला गया।

ज्योंही मुरलीधर ऑटो घुमा रहा था, तो उसे पता चला कि उस सवारी-बाबू ने अपना ब्रीफकेस ऑटो में ही छोड़ दिया है। तुरन्त वह पुलिस थाने पहुंचा और ब्रीफकेस देते हुए बोला – “राजाजीनगर के एक बाबू ने मेरे ऑटो में यह ब्रीफकेस छोड़ दिया है। कृपया आप इसे उन-तक पहुँचा दें।” पुलिस अधिकारी ने ऑटो-चालक मुरलीधर की ईमानदारी पर प्रसन्नता जाहिर की और उसे कुछ समय वहीं रुकने को कहा।

पुलिस-विभाग ने सम्बन्धित सवारी-बाबू का पता लगाकर, उसे पुलिस-थाने बुलवाया। वह बेचारा अपने ब्रीफकेस के खो जाने से काफी चिंतित था। जब उसने थाने में अपना ब्रीफकेस तथा उस ऑटो-चालक को देखा, तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा।

पुलिस-अधिकारी ने थाने में मुरलीधर को कुर्सी पर बैठाकर, हार पहनाया और उसकी ईमानदारी के लिए उसकी प्रशंसा की। जिसका ब्रीफकेस था, उसे ब्रीफकेस वापस लौटाया गया। उस बाबू ने भी ऑटो-चालक की भूरी-भूरी प्रशंसा की। खुशी से उसने मुरलीधर को पाँच सौ रुपये का पुरस्कार दिया। पहले तो वह लेने के लिए तैयार नहीं था, परन्तु पुलिस अधिकारी के आग्रह के बाद पुरस्कार प्राप्त किया। कितना अच्छा हो, बेंगलूर के सभी ऑटो-चालक मुरलीधर की तरह ईमानदार बने।

भाषा ज्ञान :

I. दिए गए निर्देशानुसार वाक्य बदलिए :

प्रश्न 1.
मेरे पास चप्पल नहीं थी। (वर्तमानकाल में)
उत्तर:
मेरे पास चप्पल नहीं है।

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प्रश्न 2.
एक बिस्तर की चादर गायब है। (भूतकाल में)
उत्तर:
एक बिस्तर की चादर गायब थी।

प्रश्न 3.
उसमें पैसे तो नहीं थे। (भविष्यत्काल में)
उत्तर:
उसमें पैसे तो नहीं होंगे।

प्रश्न 4.
कोई उठा ले गया होगा। (वर्तमानकाल में)
उत्तर:
कोई उठा लेता है।

प्रश्न 5.
वह धूप का चश्मा लगाये थे। (भविष्यत्काल में)
उत्तर:
वे धूप का चश्मा लगाऐंगे।

प्रश्न 6.
सुबह मुझे लौटना था। (भविष्यत्काल में)
उत्तर:
सुबह मुझे लौटना होगा।

II. निम्नलिखित वाक्यों के आगे काल पहचानकर लिखिए :

प्रश्न 1.
मैंने सामान बाँधा। __________
उत्तर:
भूतकाल।

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प्रश्न 2.
बड़ी चोरियाँ हो रही हैं। __________
उत्तर:
वर्तमानकाल।

प्रश्न 3.
पहले दर्जे का किराया लूँगा। __________
उत्तर:
भविष्यत्काल।

प्रश्न 4.
डेलीगेट दोपहर को ही वापस चले गये। __________
उत्तर:
भूतकाल।

प्रश्न 5.
मेरी चप्पलें देख रहे थे। _________
उत्तर:
भूतकाल।

III. इन कहावतों का अर्थ समझकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :

जैसे: कहावत : जहाँ चाह वहाँ राह ।
अर्थ : इच्छा होने पर उसे पाने का मार्ग स्वयं मिल जाता है।
वाक्य : यदि मनुष्य चाहे तो कठिन से कठिन कार्य को भी पूरा कर सकता है, क्योंकि जहाँ चाह वहाँ राह।

1) गुरु गुड़ ही रहे, चेले शक्कर हो गये।
अर्थ : शिष्य का योग्यता तथा पद में अपने गुरुजनों से ऊँचा उठना।
वाक्य : सचिन ने अपने गुरु रमाकांत आचरेकर से भी ज्यादा यश कमाया। सच कहा है गुरु गुड़ ही रहे, चेले शक्कर हो गये।

2) जैसा देश, वैसा भेस।
अर्थ : जहाँ रहना हो वहीं की रीतियों के अनुसार आचरण करना।
वाक्य : भारत पर अनेक जातियों ने आक्रमण किया। बाद में वे भारत के लोगों के बीच घुलमिल गए। जैसा देश, वैसा भेस।

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3) निर्बल के बल राम।
अर्थ : जिसकी सहायता कोई नहीं करता उसकी सहायता भगवान करते है।
वाक्य : जिसका कोई नहीं होता उसके भगवान होते है। सच है निर्बल के बल राम।

4) बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद ।
अर्थ : मूर्ख को ऐसी वस्तु मिल जाना जिसका महत्व वह नहीं समझता।
वाक्य : रमेश खुद तो कला के बारे में जानता नहीं है, इसलिए जब भी उसे कला संबंधी कोई चीज दिखाओं तो उसमें कमियाँ निकालता रहता है। सही कहा है बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।

5) हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के और।
अर्थ : कथनी व करनी में फर्क होना।
वाक्य : आजकल के नेताओं का विश्वास नहीं। इनके दाँत तो दिखाने के और होते हैं और खाने के और होते हैं।

ईमानदारों के सम्मेलन में Summary in Hindi

ईमानदारों के सम्मेलन में लेखक परिचय :
कलम को लेखक की तलवार माननेवाले श्री हरिशंकर परसाई हिन्दी साहित्य जगत् की एक बेजोड़ निधि हैं। इनका जन्म मध्य प्रदेश के जमानी गाँव में 22 अगस्त 1924 को हुआ था। इनकी कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं – ‘हँसते हैं रोते हैं’, ‘भूत के पाँव पीछे’, ‘सदाचार का तावीज़’, ‘वैष्णव का फिसलन’ आदि। हिन्दी के व्यंग्य साहित्य के विकास में इनका योगदान अद्वितीय है।

पाठ का सारांश :
लेखक अपने को ईमानदार नहीं मानते, परन्तु लोग उन्हें ईमानदार मानने लगे। लेखक को पत्र मिला – “आप देश के प्रसिद्ध ईमानदार है। हम एक ईमानदार सम्मेलन करने जा रहे हैं। अतः आप इस सम्मेलन का उद्घाटन करें। आपको आने-जाने का किराया दिया जाएगा, आवास-व्यवस्था होगी। आपके आने से उदीयमान ईमानदारों को प्रेरणा मिलेगी।’ आखिर लेखक गया, इसलिए नहीं कि वह ईमानदार है, उसे कुछ लेना-देना नहीं था। पर उन लोगों ने उसे राष्ट्रीय स्तर का ईमानदार माना ही क्यों?’खैर!

ईमानदारों के सम्मेलन में Summary in Hindi 1

स्टेशन पर उनका भव्य स्वागत किया गया। उन्हें एक शानदार होटल में ठहराया गया, जहाँ और भी कई लोग थे। लेखक ने अपने कमरे को ताला नहीं लगाया। उद्घाटन शानदार हुआ। लेखक ने करीब एक घंटे तक भाषण दिया।

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लोग जाने लगे। लेखक से लोग बातें करने लगे। जब वह चप्पल पहनने गया तो उनकी चप्पलें गायब थीं। बदले में फटी-पुरानी चप्पलें पहनकर आया। उन्हीं के कमरे में जो डेलीगेट थे, उन्होंने ही उनकी नई चप्पलें पहन रखी थीं। वे लेखक को समझाने लगे कि चप्पलें एक ही जगह नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि चोरी हो जाती है। एक ही जगह जोड़ी रहेगी तो कोई पहनकर चला जाता है। लेखक ने उनसे कहा – “अच्छा है कि आपकी चप्पलें नहीं गईं।”

ईमानदारों के सम्मेलन में Summary in Hindi 2

फिर लेखक ने देखा कि बिस्तर की चद्दर गायब है। दूसरे दिन गोष्ठियों से लौटा, तो दो और चद्दरें नहीं थीं। दूसरे दिन बैठक में जाने के लिए धूप का चश्मा ढूँढा, तो नहीं मिला। बात फैल गई। इसी समरा बगल वाले कमरे से आवाज आई, “मेरा ब्रीफकेस कहाँ चला गया?” बैठक में पन्द्रह मिनट चाय की छुट्टी थी। लोग कहने लगे – “बड़ी चोरियाँ हो रही हैं। आपका धूप का चश्मा ही चला गया। वह खुद धूप का चश्मा लगाए हुए थे, जो लेखक का ही था। वह बड़े ही इतमीनान से बैठे थे।

तीसरे दिन कुछ ठंड थी, लेखक ने सोचा कि कम्बल ओढ़ लूँ, पर कम्बल भी गायब था। फिर हल्ला हुआ। स्वागत समिति के मंत्री आये। मंत्री कार्यकर्ता को डाँटने लगे – “कितनी चोरियाँ हो रही है? यह ईमानदारों का सम्मेलन है। बात बाहर जाएगी, तो कितनी बदनामी होगी?” कार्यकर्ता ने कहा – “हम क्या करें, डेलिगेट इधर-उधर जाये, तो क्या हम उन्हें रोकें?” मंत्री ने कहा – “पुलिस को बुलाकर सबकी तलाशी ली जाएगी।”

ईमानदारों के सम्मेलन में Summary in Hindi 3

लेखक ने समझाया – “ऐसा मत कीजिए। ईमानदारों के सम्मेलन में पुलिस ईमानदारों की तलाशी ले, यह अशोभनीय बात होगी।’ एक कार्यकर्ता ने कहा – “तलाशी किनकी लेंगे? आधे डेलीगेट तो किराया लेकर वापस चले गये हैं।” रात को पहनने के कपड़े लेखक सिरहाने दबाकर सोया। नयी चप्पलें और शेविंग का डिब्बा बिस्तर के नीचे दबाया। सुबह निकलना था। उन्होंने सामान बाँधा। मंत्री ने कहा – “परसाई जी, स्वागत समिति के साथ अच्छे होटल में भोजन करेंगे। अब ताला लगा देते है। पर ताला भी चुरा लिया गया था।

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लेखक ने कहा – “रिक्शा बुलवाइये। मैं सीधा स्टेशन जाऊँगा। यहाँ नहीं रुकूँगा।” मंत्री हैरानी से बोले – “ऐसी भी क्या नाराजगी है?” लेखक ने कहा – “नाराजगी कतई नहीं है। बात यह है कि ताला तक चुरा लिया गया है। अब यदि मैं रुका तो मैं ही चुरा लिया जाऊँगा।”

ईमानदारों के सम्मेलन में Summary in Kannada

ईमानदारों के सम्मेलन में Summary in Kannada 1

ईमानदारों के सम्मेलन में Summary in Kannada 2

ईमानदारों के सम्मेलन में Summary in Kannada 3

ईमानदारों के सम्मेलन में Summary in Kannada 4

ईमानदारों के सम्मेलन में Summary in English

The following chapter is written by Harishankar Parsai. It is a comical rendition of the events that took place in a congregation of honest people.

The author did not consider himself to be honest, but the people thought so. One day, he received a letter. It was an invitation to a congregation for honest people. The letter said that the author was widely recognized as an honest person. The letter also said that a congregation for honest people was being organized, and the author was being invited to inaugurate the congregation. The travel would be paid for, and accommodation would be provided. The letter said that his presence would encourage the other delegates. Finally, the author went to the congregation not because he was honest, but because the public had considered him to be one of the most honest persons in the country.

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He was received warmly at the station. He was provided accommodation in a beautiful hotel, where some other delegates were also staying. The author did not lock his room and proceeded straight to the inauguration. The inauguration was fantastic, and the author gave a speech for about an hour.

After his speech, people began to approach him and talked to him. After a while, when the author began looking for his footwear, he found that his new slippers were missing. He took the last pair of torn and worn out slippers instead. When he reached his room, a delegate came to talk to him – he was wearing the author’s new slippers. The delegate began explaining to the author that one shouldn’t leave both slippers in the same place as it could be easily stolen. The author told the delegate that he must be thankful as his slippers weren’t stolen.

Later, the author noticed that the bedsheet was missing. The next day, when he returned from a session, he noticed that two other bedsheets had vanished. The next day, when the author wanted to wear sunglasses to the congregation as it was very sunny, he found them missing too.

Word spread that things were being stolen. At the same time, the author overheard that someone in the neighbouring room had lost his briefcase.

After the next session, a tea break of fifteen minutes was announced. During the tea break, people started discussing robberies. One of the delegates began to talk to the author. He offered his regrets that the author has lost his sunglasses. The author noticed that the delegate was wearing his sunglasses. The previous day, the delegate did not have any sunglasses, and today he was wearing the author’s own sunglasses.

When the author returned to his room that night, the weather had become a little chilly. He felt like wrapping himself up in a blanket. However, the blanket too had been stolen. Word spread about the blanket and soon, the convener of the congregation arrived. Many volunteers also arrived. The convener began shouting at the volunteers as he felt that they had not been able to prevent any of the robberies. The volunteers said that it was not possible for them to follow the delegates everywhere or to prevent them from going to anybody else’s room.

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The convener was annoyed and he decided to call the police and have everyone checked. The author pacified the convener and told him that calling the police would be a big mistake. If the police would have to be called to a congregation of honest people to check the honest people, it would be a matter of shame.

One of the volunteers said that around half of the delegates had already taken their travel allowance and left in the afternoon itself. At night, the author made a pillow out of his clothes. He kept his new slippers and shaving kit below his mattress and slept.

The next morning, it was time to leave. The convener told the author that there was still some time for the train to arrive. He invited the author to dine with the organizing committee before leaving. The convener told the author to lock his door.

However, even the lock had been stolen. Nothing had been spared, not even the lock. The author asked the convener to call a taxi. He said that he would leave straight for the station. The convener was surprised and inquired why he was so upset.

The author replied that he was not upset. He said that all things that could be stolen had already been stolen. He was the only thing that was left. He told the convener that if he stayed any longer, he might be stolen himself.

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शब्दार्थ :

  • पर्दाफाश – अनावरण;
  • कतई – हरगिज, कभी भी;
  • हलफिया – कसम से;
  • तकलीफ – कष्ट;
  • शानदार – वैभवयुत;
  • डेलीगेट – प्रतिनिधि, Delegate;
  • जलसा – समारोह, उत्सव;
  • हिचक – संकोच;
  • गनीमत – खुशी की बात;
  • चश्मा – ऐनक;
  • कागजात – कागज-पत्र;
  • हल्ला – शोर;
  • इतमीनान – भरोसा, विश्वास;
  • हरारत – हल्का ज्वर;
  • हरगिज – बिल्कुल, किसी दशा में भी;
  • सिरहाना – तकिया।
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