KSEEB Solutions for Class 9 Hindi वल्लरी Chapter 16 पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह

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Karnataka State Syllabus Class 9 Hindi वल्लरी Chapter 16 पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह

पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह Questions and Answers, Summary, Notes

अभ्यास

I. एक वाक्य में उत्तर लिखिए:

प्रश्न 1.
शहरों के नाम किसमें सिमट रहे हैं?
उत्तर:
शहरों के नाम पूर्वाक्षरों में सिमट रहे हैं।

प्रश्न 2.
किन गाँवों के नामों का परिशीलन करना ठीक रहेगा?
उत्तर:
संकोच-प्रक्रिया की बलि बने हुए कुछ गाँवों के नामों का परिशीलन करना ठीक रहेगा।

प्रश्न 3.
हेमावती नदी कहाँ बहती है?
उत्तर:
हेमावती नदी होलेनरसीपुरा में बहती है।

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प्रश्न 4.
लोगों के पास किसके लिए समय नहीं है?
उत्तर:
लोगों के पास लंबे लंबे नाम पुकारने के लिए समय नहीं है।

प्रश्न 5.
किसके कारण आज हम नाम छोटे-छोटे रख रहे हैं?
उत्तर:
समयाभाव के कारण आज हम मोहन, संदीप जैसे छोटे-छोटे नाम रख रहे हैं।

प्रश्न 6.
हमें क्या त्याग करना चाहिए?
उत्तर:
हमें अंग्रेजी वर्गों के व्यामोह का त्याग करना चाहिए।

प्रश्न 7.
इस पाठ के लेखक का पूरा नाम क्या है?
उत्तर:
इस पाठ के लेखक का पूरा नाम ‘प्रतिवादी भयंकर संपतकुमाराचार्य रामानुजम्’ है।

अधिक प्रश्नोत्तरः

प्रश्न 8.
‘टी नरसीपुर’ नाम के संबंध में संशोधक किस निर्णय पर पहुंचेंगे?
उत्तर:
संशोधक शायद इस निर्णय पर पहुंचेंगे कि ‘टि नरसीपुर’ नाम टी (चाय) के बागान के कारण आया होगा।

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प्रश्न 9.
नरसिंह का भव्य मंदिर कहाँ स्थित है?
उत्तर:
नरसिंह का भव्य मंदिर होलेनरसीपुर में स्थित है।

प्रश्न 10.
पी.एस. रामानुजम् का पूरा नाम बताइये।
उत्तर:
प्रतिवादी भंयकर संपतकुमाराचार्य रामानुजम् था।

II. दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए:

प्रश्न 1.
टी. नरसीपुरा के संक्षिप्तीकरण के बारे में लेखक के क्या विचार हैं?
उत्तर:
तिरुमकूडलु नरसीपुर अब टी नरसीपुर बन गया है। आनेवाले समय में अगर संयोग से अंग्रेजी भाषा के हटने का सौभाग्य हुआ तो इन इनिशियलों का अर्थ ढूँढ़ना मुश्किल हो जायेगा। संशोधक कहेंगे कि ‘टी नरसीपुरा’ नाम शायद नरसीपुरा में टी (चाय) के बागान होने के कारण आया होगा।

प्रश्न 2.
‘करिदोड्डन पाल्या’ के बारे में लेखक क्या कहते हैं?
उत्तर:
संकोच-प्रक्रिया का व्यंग्य करते हुए लेखक कहते है, समझ लीजिए की ‘करिदोड्डन पाल्या’ एक गाँव है। यह ‘के.डी. पाल्या’ बन जाएगा। क्रमशः वह ‘केडी पाल्य’ में रूपांतरित हो जाएगा और गाँव को बदनाम कर देगा। आगे चलकर एक दिन संशोधक निर्णय लेंगे कि इस गाँव में ‘केडियों’ (गुंडे) के होने से यह नाम आया होगा। और इस तरह उस गाँव की निष्कलंक कीर्ति में दाग लग जाएगा।

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प्रश्न 3.
इनिशियलों में सिमटे कितने गाँवों के नाम लेखक ने लिये हैं? वे कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
लगभग ग्यारह गाँवों के नाम लेखक ने लिये हैं। तिरुमकूडलु नरसीपुर, करीदोड्डन पाल्या, होलेनरसीपुरा, चिक्कनायकनहल्ली, चन्नरायपट्टण, हेग्गडदेवनकोटे, कालमुद्दन दोड्डी, विजयपुय, मेलुकोटे, श्रीरंगपट्टणा इत्यादि हैं।

प्रश्न 4.
के.आर.एस. नाम अपनी पहचान क्यों खो बैठा है?
उत्तर:
अत्यन्त मनोहर, सुंदर वृंदावन गार्डन्स वाला कृष्णराज सागर आज नीरस के.आर. सागर हो गया है। इसका लघुकरण वहीं पर नहीं रुका है। वह के.आर.एस. बनकर अंग्रेजी वर्णमाला के तीन अक्षरों में सिमटकर अपनी पहचान खो बैठा है।

अधिक प्रश्नोत्तरः

प्रश्न 5.
‘होलेनरसीपुर’ के बारे में लेखक क्या चिंता प्रकट करते हैं?
उत्तर:
लेखक कहते हैं कि मनोहर हेमावती नदी और नरसिंह के भव्य मंदिर वाला ‘होलेनरसीपुर’ आज एच.एन. पुरा बन गया है। जब इसका कन्नड़ीकरण ‘हेच्चिपुर’ (फालतू नगर) या “एच्चमपुर’ में हो जायेगा तब यह अपना मूल नाम ही खो देगा।

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प्रश्न 6.
इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में अगर पूर्वाक्षरों का उपयोग किया गया तो क्या स्थिति होगी?
उत्तर:
अगर इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में अगर पूर्वाक्षरों का उपयोग किया गया तो राणा प्रतापसिंह आर.पी. सिंह बन जाएगा, औरंगजेब ए. जेब बनेगा। समुद्रगुप्त एस. गुप्त हो जाएगा। चंद्रगुप्त सी. गुप्त और अमात्य राक्षस ए. राक्षस बनेगा। पुलकेशी पी. केशी और मयूर वर्मा एम. वर्मा बन जाएगा।

III. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

  1. आगे आनेवाले संशोधकों को __________ करने का काम है।
  2. सबको पूर्वाक्षरों में छिपा देना बड़ा ही ___________ विषय है।
  3. सुबह नाम ___________ प्रारंभ करो तो समाप्त होते-होते _________ हो जाती थी।
  4. कभी-कभी तो पूरा का पूरा नाम ही ___________ में सिकुड़ जाता है।
  5. सभी ___________ विद्यार्थियों की जिह्वा पर अंग्रेजी के वर्ण बनकर सुशोभित होते हैं।

उत्तरः

  1. पथभ्रष्ट;
  2. दर्दनाक;
  3. पुकारना, शाम;
  4. अंग्रेजी वर्णों;
  5. अध्यापक।

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IV. जोड़ी मिलाइएः

1) होलेनरसीपुरा – अ) तिरुपति देवालय
2) बी.आर. हिल्स – आ) कृष्णराज सागर
3) टी.डी. – इ) मयूर वर्मा
4) के.आर.एस. – ई) रंगनाथ स्वामी
5) एम. वर्मा – उ) नरसिंह मंदिर
उत्तरः
1. उ;
2. ई;
3. अ;
4. आ;
5. इ।

V. विलोम शब्द लिखिएः

  1. अपना × _________
  2. सहज × _________
  3. नया × _________
  4. सुंदर × _________
  5. मुश्किल × _________
  6. अच्छा × _________
  7. कीर्ति × _________
  8. हानि × _________
  9. पास × _________
  10. सुबह × _________

उत्तर:

  1. अपना × पराया
  2. सहज × कठिन
  3. नया × पुराना
  4. सुंदर × कुरूप
  5. मुश्किल × आसान
  6. अच्छा × बुरा
  7. कीर्ति × अपकीर्ति
  8. हानि × लाभ
  9. पास × दूर
  10. सुबह × शाम

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VI. निम्नलिखित विलोम शब्दों को सही शब्दों के साथ जोड़कर लिखिएः

  1. आस्तिक × अ) अनुत्तीर्ण
  2. पता × आ) बेशक
  3. दिन × इ) नास्तिक
  4. शक × ई) रात
  5. उत्तीर्ण × उ) लापता

उत्तरः

  1. इ;
  2. उ;
  3. ई;
  4. आ;
  5. अ।

VII. अन्य वचन रूप लिखिए:

  1. बात – _______
  2. प्रवृत्ति – _________
  3. गुंडा – _________
  4. नदी – ___________
  5. दंतकथा – ___________
  6. घटना – ____________
  7. पुस्तक – ____________
  8. देवता – ____________

उत्तरः

  1. बात – बातें
  2. प्रवृत्ति – प्रवृत्तियाँ
  3. गुंडा – गुंडे
  4. नदी – नदियाँ
  5. दंतकथा – दंतकथाएँ
  6. घटना – घटनाएँ
  7. पुस्तक – पुस्तकें
  8. देवता – देवता

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VIII. अन्य लिंग रूप लिखिएः

  1. आदमी – _________
  2. नायक – _________
  3. राजा – _________
  4. देवता – _________
  5. स्वामी – _________
  6. बाप – _________
  7. अध्यापक – _________

उत्तरः

  1. आदमी – औरत
  2. नायक – नायिका
  3. राजा – रानी
  4. देवता – देवी
  5. स्वामी – स्वामिनी
  6. बाप – माँ
  7. अध्यापक – अध्यापिका

IX. कन्नड़ में अनुवाद कीजिए:

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X. अनुरूपताः

  1. करीदोड्डन पाल्या : के.डी. पाल्या : : होलेनरसीपुरा : __________
  2. पूर्वाक्षर : उपसर्ग शब्द : : कन्नड़पन : ___________
  3. ए.जेब : औरंगजेब : : एस. गुप्त : _________
  4. बी.आर. हिल्स : बिलिगिरि रंगनबेट्टा : : डी.आर. दुर्गा : ___________

उत्तरः

  1. टी नरसीपुरा;
  2. प्रत्यय;
  3. समुद्रगुप्त;
  4. देवरायन दुर्गा।

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भाषा ज्ञान

‘कि’ और ‘की’ का प्रयोग
‘कि’ का प्रयोग
समुच्चयबोधक अव्यय के रूप में। मुख्य वाक्य को आश्रित वाक्य/उपवाक्य से जोड़ने के लिए इस अव्यय का प्रयोग होता है।
उदाः समझ लीजिए कि करीदोड्डन पाल्या नामक एक गाँव है।

‘की’ का प्रयोग
अ) संबंधबोधक कारक प्रत्यय के रूप में।
उदाः

  1. दशरथ की तीन रानियाँ थीं।
  2. बगीचे की हवा शुद्ध होती है।

आ) ‘करना’ क्रिया के भूतकाल का स्त्रीलिंग रूप है।
उदाः

  1. सिपाही ने देश की रक्षा की।
  2. उषा ने परीक्षा में नकल नहीं की

इ) अन्य कुछ संबंधसूचक अव्ययों के पूर्व ‘की’ का प्रयोग होता है।
उदाः की ओर, की तरफ, की भाँति, की बगल, की अपेक्षा आदि।

I. ‘की’ कि सहायता से वाक्य पूर्ण कीजिए:

  1. मेरी बेटी ने आई.ए.एस. __________ परीक्षा ली है।
  2. छात्रों ___________ कोई गलती नहीं थी।
  3. कर्नाटक __________ राजधानी बेंगलूरु है।
  4. रमेश ने चोरी नहीं __________ थी।
  5. शिल्पा ने गलती नहीं ___________।

उत्तरः

  1. मेरी बेटी ने आई.ए.एस. की परीक्षा ली है।
  2. छात्रों की कोई गलती नहीं थी।
  3. कर्नाटक की राजधानी बेंगलूरु है।
  4. रमेश ने चोरी नहीं की थी।
  5. शिल्पा ने गलती नहीं की

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II. ‘कि’ समुच्चयबोधक अव्यय के प्रयोगवाले पाँच वाक्य पाठ में से चुनकर लिखिए और अर्थ समझिए।

  1. यह भी हो सकता है कि लोकोपयोगी विभाग वालों ने गाँवों के नाम लिखने के लिए छोटे फलक बनाए हों।
  2. संशोधक शायद इस निर्णय पर पहुंचेंगे कि टी. नरसीपुरा नाम प्रायशः नरसीपुरा में टी (चाय) के बागान होने के कारण आया होगा।
  3. समझ लीजिए कि ‘करीदोड्डन पाल्या’ नामक एक गाँव हैं।
  4. अगर कोई कहे कि ‘मैंने एक संकल्प लिया है।
  5. संशोधक निर्णय लेंगे कि इस गाँव में ‘केडियों’ (गुंडे) के होने से यह नाम आया होगा।

पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह Summary in Hindi

पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह लेखक परिचयः
पी.एस. रामानुजम् का जन्म 6 अक्तूबर 1941 को चामराजनगर के बेडमूडलु गाँव में हुआ। इनके पिता का नाम प्रतिवादी भयंकर संपतकुमार आचार्य था। माता का नाम इंदिरम्मा था। प्रारंभिक शिक्षा चामराजनगर के हरदनहल्ली में शुरु हुई। मैसूरु के महाराजा कॉलेज में बी.ए. में पाँच स्वर्ण पदक लेकर उत्तीर्ण हुए। संस्कृत में इन्होंने पीएच.डी. और डी.लिट. की उपाधि प्राप्त की।

बचपन से ही कविता, कहानी लिखने की रुचि इनमें थी। आई.पी.एस. में छटा रैंक प्राप्त करके कर्नाटक के पुत्तूरु, कोडगु, कोलार आदि स्थानों में ए.एस.पी., एस.पी., डी.जी.पी. के पदों पर काम करके निवृत्त हुए। ‘बिल्ली की भाषा’ और अन्य लेखों के संकलन से इनको कीर्ति मिली। 30 से अधिक रचनाएँ इन्होंने की हैं। साहित्य सेवा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा पुलिस विभाग में योग्य सेवा के लिए इनको राष्ट्रपति पदक भी प्राप्त हुआ है। प्रस्तुत व्यंग्य रचना ‘बिल्ली की भाषा’ से चुना गया है। इसका अनुवाद प्रो. नंदिनी गुंडुराव जी ने किया है।

पाठ का आशयः
इस व्यंग्य रचना में लेखक ने अंग्रेजी भाषा-मोह के प्रभाव पर तीक्ष्ण व्यंग्य किया है। हमारे पठन-लेखन से लेकर गाँव-शहरों के नाम, राजा-महाराजाओं के नाम और यहाँ तक कि भगवानों के नामों का भी संक्षिप्तीकरण करने से होनेवाली असमंजसता के बारे में प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है। छात्रों को इस रचना द्वारा सुझाव दिया गया है कि वे अपने नाम और जन्मस्थानों की पहचान बनाए रखने के लिए पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह छोड़ दें।

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सारांशः
इस व्यंग्य रचना में लेखक ने अंग्रेजी भाषा-मोह के प्रभाव पर तीक्ष्ण व्यंग्य किया है। आजकल शहरों, गाँवों के नाम, राजाओं के नाम यहाँ तक कि भगवानों के नाम पूर्वाक्षरों में याने अंग्रेजी के इनिशियलों में सिमट कर अपना अर्थ खो रहे है। इस वजह से कर्नाटक के शहरों के नाम अपना कन्नड़पन, पहचान, अपना अस्तित्व खो रहे हैं। कुछ उदाहरण देखिये, सुंदर ‘तिरुमकूडलु नरसीपुर’ अब ‘टी नरसीपुर’ बन गया है। आगे कभी इस गाँव के इस नये नाम पर शोध हुआ तो चौंकाने वाले परिणाम आएंगे।

संशोधक कहेंगे ‘टी नरसीपुर’ नाम शायद नरसीपुरा में ‘टी’ के बागान होने के कारण आया होगा। वैसे ही ‘करीदोड्डन पाल्या’ केडी पाल्या में बदल जायेगा। संशोधक कहेंगे इस गाँव में ‘केडियों’ (गुंडे) होने के कारण यह नाम आया होगा। ‘होलेनरसीपुरा’ जहाँ हेमावती नदी और नरसिंह का मन्दिर है, आज एच.एन. पुरा बन गया है। धीरे धीरे यह हेच्चिपुर (फालतूनगर) या ‘एच्चमपुर’ में बदल जाएगा।

इसी प्रकार ‘चिक्कनायकन हल्ली’ – ‘सी.एन. हल्ली’ और ‘सीयनहल्ली’ में, चन्नरायपट्टणा ‘सी.आर. पट्टणा’ बन गया है। पता नहीं कब श्रवणबेलगोला ‘एस.बी. गोला’ बन जायेगा। यह बहुत दर्दनाक है। आजकल लोगों के पास बड़े नाम जैसे ‘तिरुमले श्रीनिवासवरद रंगनाथ देशिक ताताचार’ पुकारने का समय नहीं रह गया है। यह ठीक है लेकिन शहरों-गाँवों के नाम संक्षिप्त नहीं करने चाहिए।

पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह Summary in Hindi

आज अगर कोई कहे कि मैं टी.डी. जाकर वि.सी. के दर्शन कर आऊँगा तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इसका अर्थ होगा तिरुपति देवालय जाकर वेंकटाचलपति के दर्शन कर आऊँगा। वेणुगोपाल स्वामी को वि.जी. स्वामी भी कहा जा सकता है। अत्यंत मनोहर, सुंदर वृंदावन गार्डन वाला कृष्णराज सागर आज के.आर. सागर के रूप में प्रचलित है और धीरे धीरे के.आ.एस. में बदलकर अपनी पहचान खो बैठा है।

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एक बार स्वयं लेखक भी आय.पी.एस. उत्तीर्ण होकर आगे की पढ़ाई के लिए माऊंट आबू की शिक्षा-अकादमी में गये। पहले दिन एक अफसर सबके नाम लिखने लगा। जब लेखक की बारी आई उन्होंने अपना नाम ‘प्रतिवादी भयंकर संपतकुमाराचार्य रामानुजम्’ बताया जो उन्हें समझ में भी नहीं आया। इसलिए व्यक्तियों के बड़े नामों को इनिशियलों में छुपाना फिर भी ठीक है। लेकिन बाकी क्षेत्रों में यह उचित नहीं है। ऐसा न हो कि हम राणा प्रतापसिंह को इतिहास में आर.पी. सिंह और चंद्रगुप्त को सी.गुप्त कहने लग जाएँ। हमें इस ‘पूर्वाक्षर के पूर्वाग्रह’ से बचना होगा। कन्नड़ के सुंदर नामों का संपूर्ण रूप में प्रयोग करना ही अच्छा है। हमारा उच्चारण भी शुद्ध होगा और नाम भी बच जाएँगे।

पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह Summary in Kannada

पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह Summary in Kannada 1
पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह Summary in Kannada 2
पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह Summary in Kannada 3
पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह Summary in Kannada 4
पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह Summary in Kannada 5
पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह Summary in Kannada 6
पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह Summary in Kannada 7

पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह Summary in English

In this essay, the author P.S. Ramanujam has satirised on the consequences of our love for the English language. The author has made an attempt to highlight the suspense caused by the use of abbreviations of words from reading and writing to names of villages to names of kings and to even names of Gods. The author suggests that in order to retain the identity of our name and place of birth we should give up our prejudice towards abbreviating words.

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Nowadays names of cities are being contracted to their initials. This is a matter of grave concern. Because of these initials, names of many cities of Karnataka have been losing their Kannadaness, identity and existence. There was a time when initials were attached only before the names of people. Today we are using initials even for the names of cities. It is difficult to understand whether this tendency to abbreviate is human nature or it is some new fashion. The author remarks humorously that it is possible that the PWD Department must have got small boards prepared and hence shortened the names of villages to fit the size of the boards.

It is worthwhile to examine the names of a few villages that are victims of the process of shortening of names. “Tirumakoodalu Narsipura’ has now become ‘T Narsipura’. This could misguide a researcher in the future. If by chance English were to cease to exist in our country, it would be difficult to find out the meaning of these initials. Much research will have to be made and the results would be amazing. The researchers may arrive at the conclusion that perhaps ‘T Narsipura’ acquired its name because of the tea plantations that existed there.

The author asks us to imagine that there is a village called “Karidoddana Palya’. It would become ‘K.D. Palya’. Sometime later this would be transformed into ‘Kedipalya’ which will disgrace the village. In the future, the researchers will come to the conclusion that this village acquired the name because the village had kids or rowdies. Thus the village will get a bad name unnecessarily.

Now hear the story of ‘Hole Narsipura’. This village with the humming sound of the Hemavathi river and majestic temple of Narasimha has today become ‘H.N. Pura’. Gradually this may be changed as ‘Hechchipura’ (worthless village) or ‘Echchampura’ and legends will grow around it. The river Hemavathi, Narasimha everything is sunk in the English initials and their beauty survives only in the stones of the Public Works Department. This is also the misfortune of the residents of Hole Narsipura, the Hemavathi river and Narasimha.

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Take the example of ‘Chikkanayakana Halli’. Today it has become ‘C.N. Halli’. In future, it may become ‘Seeyana Halli’. Similarly, Channarayapattana has become ‘C.R. Pattana’. ‘Heggadadevanakote’ is now ‘H.D. Kote’. Hiding the names of leaders, kings, and gods that have ruled this place in the form of initials is quite painful.

‘Kalamuddana Doddi’ is now called ‘K.M. Doddi’. One cannot say when ‘Shravanabelagola’ will become ‘S.B. Gola’ and ‘Vijayapura’ will become ‘V. Pura’. When we use the initials for the names that are made of two or three words it becomes an abbreviation. It seems nowadays people have no time to call long names. There was a time when people had such long names as ‘Tirumale Srinivasavarada Ranganatha Deshika Thathachar’. If you were to start calling the name in the morning, it would be evening by the time you completed it. Because of a shortage of time, we are now naming children by such short names as Mohan, Sandeep and so on. But the names of cities and villages could have been left as they were.

Perhaps even Englishmen may not have distorted the names of their villages in this manner. This is one topic in which we have gone ahead of them and we have reduced the names and made them look like small formulae. In this world of names, we are making the original names disappear according to the theory ‘this world is false’.

The author feels that to make our dealings easy, abbreviating will become the style in the future. For instance, if anyone says, “I have made a resolution for which I will go to T.D. and see V.C.”, we should not be surprised. Its meaning is “I will go to Tirupati temple and see Venkatachalapathi”. Similarly, if someone says, “I will go to M. Kote and see C.R. Swamy” we must not be confused. Its meaning is, “I will go to Melkote and see Cheluvaraya Swamy”. If someone says, “V.G. Swamy’s Abhisheka has to be arranged”, we should understand that Venu Gopala Swamy’s Abhisheka or consecration is being done.

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Our ‘Biligiriranganabetta’ has become ‘B.R. Hills’ and has been completely Anglicised. The presiding deity ‘Ranganatha Swamy’ has become ‘R.N. Swamy’. Do you know ‘D.R. Durga’? It is our Devarayana Durga. Two Swamijis live there – one is Y.N. Swamy and the other is B.N. Swamy, that is, Yoganarasimha Swamy and Bhoganarasimha Swamy. G.N Swamy lives in T. Narsipura, that is, Gunja Narasimha Swamy.

The very attractive and beautiful Krishnaraja Sagar with the Brindavan Gardens has today become the insipid K.R. Sagar. Its shortening has not stopped there. It has been contracted into three letters of the English alphabet and has lost its identity. It is also our misfortune that Srirangapattana has become S.R. Pattana and Ranganatha Swamy has become R.N. Swamy.

It does not matter if the names of individuals are reduced to initials, but there is no need to contract the names of villages. Contracting the names of individuals is necessary; otherwise, people would not be able to call each other. It would be a great adventure to call anyone by his name who attaches the name of 1.is family, name of his village and his father’s name to his name. it would be evening by the time we were to remember and call such names.

The author then talks about a personal incident. After passing the I.P.S. examination he had gone to Mount Abu academy for training. On the first day, all were made to stand in a line and an officer wrote down their names. They were standing on the parade ground and getting their names recorded. Everyone had to tell his full name including the expansion of the initials. The first person in the line said his name was Mahendranarayan Singh; the second person was Devavrata Bandopadhyaya. This continued for some time.

When the author’s turn came to give his name, expanding the initials he said ‘Prativadi Bhayangkara Sampatakumaracharya Ramanujam’. The officer looked at him and in a shrill voice asked him to come to his office and get his name registered. Then he started writing the name of the next candidate. The author says, when the name is so long what else could the officer do.

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The author says it is good that we have not applied this tradition of abbreviating words to textbooks, especially history books. If this is done Rana Pratap Singh would become R.P. Singh, Aurangzeb would become A. Jeb and Samudragupta would become S. Gupta. Chandragupta would become C. Gupta, Amatya Rakshasa would become A. Rakshasa, Pulakeshi would become P. Keshi and Mayura Varma would become M. Varma.

In this way nowadays half the name is being hidden in the initials. Sometimes the whole name contracts into the letters of the English alphabet. This is a common feature in schools and colleges. The names of the teachers are adorned on the tongues of the students in the form of English letters.

There is no doubt about the influence of the letters of the English alphabet on our names. This is a new form of bewilderment. We should give this up. Only the use of Kannada alphabets is safe for us. Still, better would be using the beautiful names in Kannada in their full form. Our pronunciation would be clear and the names would also survive.

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